श्रीडूंगरगढ़ ONE के एक लाख फेसबुक फॉलोवर पूरे होने पर श्रीडूंगरगढ़ ONE द्वारा एक साप्ताहिक कॉलम अनकही-अनसुनी शुरू किया जा रहा है। क्षेत्र में राजनीतिक, प्रशासनिक एवं सामाजिक हलकों की वह चर्चाएं इस कॉलम के माध्यम से की जाएगी, जिनकी चर्चा अनकही और अनसुनी ही रह जाती है। श्रीडूंगरगढ़ ONE द्वारा यह विशेष चटपटा कॉलम गत विधानसभा चुनावों के दौरान भी प्रतिदिन की सीरिज के रूप में चलाया गया था और यह सीरिज खासी लोकप्रिय भी हुई थी। श्रीडूंगरगढ़ ONE टीम का प्रयास रहेगा कि पाठकों के समक्ष क्षेत्र के अंदरखाने की चर्चाओं को पहुंचाया जा सके।
पिंजरे के पंछी रे, तेरा दर्द ना जाने कोय।
श्रीडूंगरगढ़ ONE। 1957 में आई फिल्म नागमणि का एक गीत सुफियाना अंदाज में बड़ा प्रसिद्ध हुआ था, जिसके बोल थे “पिंजरे के पंछी रे, तेरा दर्द ना जाने कोय”, इन दिनों यह गाना क्षेत्र के राजनीतिक मुखिया द्वारा भी गाहे-बेगाहे गा ही दिया जाता है। मुखियाजी को अपने कार्यकाल में करवाए गए क्षेत्र में अभूतपूर्व विकास कार्य करवाने के बाद भी उसका प्रचार नहीं होने की, कोई छोटी मोटी कमी रह जाए तो उसका दुष्प्रचार अधिक होने का दु:ख साल रहा है। मुखियाजी ने हाल ही में शहर में हुए एक कार्यक्रम में इस दु:ख का ठीकरा अपने सर्मथकों के सिर पर फोड़ा एवं मंच, माईक पर ही उलाहना दे दिया, कि “मेरा काम तो काम करवाना है, उसका जन जन तक प्रचार नहीं कर पाना कार्यकर्ताओं की कमी है, मैं खुद थोड़े अपने काम गिनवाऊंगा।“ अब कार्यकर्ताओं की अनसुनी-अनकही बात यह है, कि कोई काम पड़ने पर मुखिया जी से मिलना ही मुश्किल है तो उनके काम की चर्चा कब कर पांए.? क्योंकि चर्चा में तो यही रह जाता है कि साहब ऊपर थे पर घंटों इंतजार करवा कर भी नहीं मिले।
हरफनमौला प्रदर्शन कर बार्डर क्रासिगं के प्रयासों से चल पड़ी परिसिमन की चर्चा।
श्रीडूंगरगढ़ ONE। सांसद के कार्यभार की पॉवर ऑफ अर्टानी संभालने वाले जिले के युवा नेता इन दिनों जिले भर में अपनी ब्राडिंग में जुटें है, इसके लिए समय-समय पर अलग-अलग प्रयोग भी किए जाते रहे हैं। आम चर्चा है, कि बड़े नेता की वंश परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए इन युवा नेताजी को आगामी विधानसभा चुनावों से पहले पहले जमीन तलाश कर स्थापित होने के लिए यह करना भी चाहिए। जिले भर के राजनेताओं में इनकी सक्रियता को जिले के बोर्डर वाले इलाके में और जिले में परिसिमन के बाद नई बनने वाली नई विधानसभा सीट के क्षेत्र में होने को तो जस्टिफाई भी किया जाता है। लेकिन श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र में इन नेताजी द्वारा बड़ी संख्या में टी-शर्ट भेजने से नई चर्चा का जन्म हो गया है। नेताजी के फोटो लगे टी-शर्ट में संदेश तो युवाओं को नशा-मुक्ति का दिया गया है, लेकिन टी-शर्ट पहन कर घुमने वाले उनके सर्मथकों के कारण इन चर्चाओं में क्षेत्र के राजनीतिक हलकों में सवाल खड़ा हो गया है, कि यह सक्रियता यहां क्यों..? ऐसे में अनकही अनसुनी बात यह निकल कर आ रही है कि जिले में परिसिमन के बाद दो नई विधानसभाओं का गठन भी चर्चाओं में है। ऐसे में आरक्षित तो एक ही होगी एवं दूसरी के लिए लाटरी निकाली जा सकती है। तो जब बात लॉटरी की आ जाए तो सक्रियता पूरे जिले में ही बनती है।
खेजड़ी माता की जय।
श्रीडूंगरगढ़ ONE। श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र में नई-नई माताओं की उत्पत्ति एवं जयकारे लगाने का शगल सा चल पड़ा है। यहां पीछे कुछ दिन पहले जहां होली-माता के जयकारे भी खूब गूंजे, वहीं अब इन दिनों में खेजड़ी माता के जयकारे भी लग रहे है। हो कुछ युं रहा है, कि कुछ समय पहले बीकानेर में हुआ खेजड़ी बचाओ आंदोलन हो या उस आंदोलन के बाद राज्य सरकार द्वारा खेजड़ी काटने को अपराध घोषित करने के जुमले हो, इनके कारण क्षेत्र में कई जगहों पर लग रहे विभिन्न प्रोजेक्ट में खेजड़ी कटाई माता के वरदान जैसा हो गया है। इन प्रोजेक्ट में पहले खेजड़ी कटाई ठेके पर होती थी और प्रोजेक्ट लगाने वाली कम्पनी के पास फ्री में खेजड़ी काट कर ले जाने वाले मजदूरों की उपलब्धता हो जाती थी। अब हालात यह है कि फ्री में होने वाले इस काम के एवज में महंगी मजदूरी में खेजड़ी की कटाई, रातों रात कई-कई बीघा में जेसीबी एवं बड़ी मशीनों से खेजड़ी को दफनाना भी पड़ रहा है। महंगाई यहीं तक नहीं रूक रही, अब खेजड़ी कटाई का विरोध भी कम्पनियों को महंगे में मैनेज हो रहा है। श्रीडूंगरगढ़ में कितासर का सीमेंट प्रोजेक्ट हो चाहे सोलर प्रोजेक्ट हो या कई गांवों में चल रहे सोलर प्रोजेक्ट हो, कई स्थानों पर अब विरोध का दौर मैनेज होने तक ही चल रहा है। अनकही अनसुनी बात यह है कि जैसे मां मर कर भी अपने बच्चों का भला कर देती है, वैसे ही लगातार खेजड़ी की अंधाधूंध कटाई में दम तोड़ रही खेजड़ी-माता अपनी कटाई का विरोध करने वाले बच्चों का भला ही कर मर रही है।
खाखी के इकबाल पर भारी पड़ता दिखा खादी का किरदार।
श्रीडूंगरगढ़ ONE। श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र में खाखी का इकबाल हमेशा ही बुलंद रहा है एवं इतिहास गवाह है कि क्षेत्र में खादी का किरदार हमेशा से ही खाखी के इकबाल को कायम रखने में सहयोगी ही रहा है। लेकिन इन दिनों क्षेत्र के सबसे बड़े गांव में बीच बाजार सरेआम हुई खाखी के अपमान के मामले में खादी का किरदार खाखी के इकबाल पर भारी पड़ता दिखा है। खाखी के साथ हुई इस घटना के बाद क्षेत्रवासियों ने उम्मीद की थी कि खाखी का इकबाल कायम रखने के लिए प्रभावी कार्रवाई होगी। लेकिन घटना के 72 घंटे बीत जाने के बाद भी कोई कठोर कार्रवाई नहीं होने से थाने सहित विभिन्न स्थानों पर चर्चाओं का दौर चल पड़ा है। अनकही अनसुनी यह है कि घटना के बाद खाखी पर हाथ उठाने के बाद आरोपी ने गांव के बाजार में ऐलानिया तौर राज के जोर का शोर भी किया था और कार्रवाई धीमे पड़ने के पीछे आरोपियों की राज में भागीदारी का जोर है।