यह केवल एक पत्रिका का स्वर्ण जयंती वर्ष नहीं है, बल्कि राजस्थानी भाषा और साहित्य के प्रति समर्पित एक यात्रा का उत्सव है। इस विशेष अवसर को यादगार बनाने के लिए संस्थान ने वर्ष भर चलने वाले साहित्यिक, सांस्कृतिक और शोध से जुड़े कार्यक्रमों की एक श्रृंखला आयोजित करने का निर्णय लिया है।
संस्थाध्यक्ष श्याम महर्षि ने कार्यकारिणी की बैठक में लिए गए निर्णयों की जानकारी देते हुए बताया कि ‘राजस्थली’ देश की एकमात्र ऐसी राजस्थानी भाषा माध्यम की पत्रिका है जो यह गौरवपूर्ण उपलब्धि हासिल करेगी। उन्होंने पत्रिका के निरंतर प्रकाशन और राजस्थानी भाषा के प्रति इसके अटूट समर्पण को रेखांकित किया।
उपाध्यक्ष डॉ. मदन सैनी ने बताया कि स्वर्ण जयंती वर्ष में पत्रिका के विशेषांक प्रकाशित किए जाएंगे, जिनमें राजस्थानी भाषा के प्रचार-प्रसार और भाषायी मान्यता को बढ़ावा देने के लिए कई नए प्रयास शामिल होंगे।
इस श्रृंखला में, संस्थान ने पिछले वर्ष शुरू किए गए दो महत्वपूर्ण सम्मानों को भी जारी रखने का निर्णय लिया है। श्री सूर्य प्रकाश बिस्सा स्मृति राजस्थानी महिला लेखन सम्मान और कला-डूंगर कल्याणी स्मृति राजस्थानी बाल साहित्य सम्मान, राजस्थानी साहित्य में महिलाओं और बाल साहित्यकारों के योगदान को सम्मानित करने के उद्देश्य से स्थापित किए गए हैं।
सम्मान समिति के संयोजक रवि पुरोहित ने बताया कि इन सम्मानों के लिए मौलिक और अप्रकाशित पांडुलिपियां आमंत्रित की गई हैं। महिला लेखन सम्मान के लिए 96 से 128 पृष्ठों तक की और बाल साहित्य सम्मान के लिए 64 से 72 पृष्ठों तक की पांडुलिपियां साहित्य की किसी भी विधा में भेजी जा सकती हैं। पांडुलिपियों को स्पष्ट टंकित रूप में 20 अक्टूबर, 2025 तक सचिव, मरूभूमि शोध संस्थान, संस्कृति भवन, एन.एच.11, जयपुर रोड़, श्रीडूंगरगढ (राजस्थान)-331803 के पते पर पहुंचाना होगा।
‘राजस्थली’ की स्वर्ण जयंती, राजस्थानी भाषा और साहित्य के लिए एक नई उम्मीद लेकर आई है। यह पत्रिका न केवल राजस्थानी साहित्य को बढ़ावा देने का एक माध्यम है, बल्कि यह मरूभूमि की संस्कृति और लोक चेतना को भी जीवित रखने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।