श्रीडूंगरगढ़ अंचल में इन दिनों आस्था का ज्वार उमड़ रहा है। गाँवों और मंदिरों में विभिन्न धार्मिक आयोजन हो रहे हैं, जिनमें स्थानीय लोगों की गहरी श्रद्धा और जुड़ाव दिखाई दे रहा है।
जाखासर गाँव की मुख्य गुवाड़ में गुरुवार की रात तेजाजी के जागरण का आयोजन किया गया। लोकदेवता तेजाजी के प्रति आस्था का यह अनूठा रूप है, जहाँ तेजा गायन के साथ रात भर जागरण किया गया। इस अवसर पर प्रसिद्ध तेजा गायक सहदेव चोयल और सुखाराम ने अपनी प्रस्तुतियाँ दीं। नृत्य कलाकारों किरण, शिवानी और कैलाश बाड़मेर ने भी अपनी कला से समां बांधा। आयोजक मंडल ने सभी तेजा भक्तों से इस जागरण में शामिल होने का आग्रह किया, जिससे यह आयोजन एक सामुदायिक मिलन का भी रूप ले गया।
सूत्रों के अनुसार, खरनाल पैदल यात्री संघ शुक्रवार दोपहर अपनी दूसरी फेरी के लिए रवाना होगा। संघ के सदस्य इस यात्रा को सफल बनाने के लिए तैयारियों में जुटे हुए हैं।
गुसांईसर बड़ा गाँव में स्थित हरिराम जी मंदिर में पंचमी के अवसर पर विशेष आयोजन हुआ। बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा हरिराम जी के दर्शन के लिए उमड़े। बालाजी मंदिर में हरिराम जी का हवन संपन्न हुआ, जिसमें श्रद्धालुओं ने घी और खोपरे की आहुतियां दीं। हवन में गांव में सुख, शांति और अच्छी वर्षा की कामना की गई। मुख्य यजमान अत्तूराम शर्मा रहे और इस दौरान रतनलाल शर्मा, धनराज शर्मा, श्रीराम सारस्वत, सत्यनारायण सारस्वत, भंवरलाल शर्मा और महेंद्र शर्मा जैसे गणमान्य लोग उपस्थित रहे। पंडित परमेश्वर सारस्वत ने हवन विधि संपन्न कराई।
बिग्गाबास स्थित हरिराम जी मंदिर में पंचमी पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। भक्त बाबा को पताशे, नारियल और मावे के पेठों का भोग लगाकर अपनी मन्नतें पूरी करते दिखे। मंदिर के पुजारी किशोरगिरी ने विधि-विधान से बाबा का पूजन संपन्न करवाया। मंदिर प्रांगण को विशेष रूप से सजाया गया था और गली में रोशनी की व्यवस्था की गई थी। शाम को यहां एक मेला भी लगा, जिसमें अस्थाई दुकानें सजीं। बच्चों ने चाट और आइसक्रीम का आनंद लिया और छोटे-मोटे खिलौने खरीदे।
कालू रोड पर बालाजी नगर के पास स्थित नखत बन्ना के मंदिर में पंचमी के अवसर पर विशेष पूजन का आयोजन किया गया। मंदिर को सुंदर ढंग से सजाया गया और नखत बन्ना की मूर्ति का श्रृंगार किया गया। विधि-विधान से ज्योत आरती संपन्न की गई। अनेक श्रद्धालु नखत बन्ना के दर्शन के लिए पहुंचे और अपनी श्रद्धा अर्पित की।
ये आयोजन न केवल धार्मिक महत्व रखते हैं, बल्कि ये सामुदायिक सद्भाव और सामाजिक एकजुटता के प्रतीक भी हैं। इन आयोजनों में लोगों का उत्साह और श्रद्धा देखते ही बनती है, जो श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर को जीवंत रखे हुए है।