किसानों का आरोप है कि विभाग बकाया बिलों की वसूली के नाम पर पुलिस बल का सहारा ले रहा है और किसानों को डरा-धमका कर उनके खेतों से ट्रांसफार्मर उठा रहा है। किसानों का कहना है कि यह कार्रवाई ऐसे समय में की जा रही है जब उनकी फसलें पकने को तैयार हैं और उन्हें सिंचाई की सख्त जरूरत है।
किसान सभा के नेताओं ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसान बिजली बिलों का भुगतान करने को तैयार हैं, लेकिन विभाग को अपनी मनमानी छोड़कर मानवीय दृष्टिकोण अपनाना होगा। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि ट्रांसफार्मर उतारने की कार्रवाई नहीं रोकी गई तो आगामी सोमवार को विभाग का घेराव किया जाएगा।
एक्सईएन कार्यालय से अपनी बात रखने के बाद किसान उपखंड कार्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने उपखंड अधिकारी शुभम शर्मा से मुलाकात कर उन्हें एक ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में किसानों ने गोजा लट और कातरे से फसलों को हुए नुकसान का विशेष आकलन (स्पेशल गिरदावरी) करवाने की मांग को दोहराया।
किसान सभा के सदस्यों ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने किसानों की समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया तो वे व्यापक आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। इस दौरान माकपा तहसील सचिव मुखराम गोदारा, किसान सभा तहसील अध्यक्ष भंवरलाल भुवाल, सचिव राजेंद्र जाखड़, देवीसिंह भाटी सहित अनेक किसान और सरपंच मौजूद रहे, जिन्होंने एकजुट होकर अपनी मांगों को प्रशासन के समक्ष रखा।
यह घटनाक्रम श्रीडूंगरगढ़ के किसानों की मौजूदा स्थिति को दर्शाता है, जहां एक तरफ वे प्राकृतिक आपदाओं से जूझ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बिजली विभाग की कार्रवाई ने उनकी चिंताएं और भी बढ़ा दी हैं। अब देखना यह है कि प्रशासन और विभाग किसानों की मांगों पर कितनी जल्दी और किस तरह से संज्ञान लेते हैं।