श्रीडूंगरगढ़ श्रीडूंगरगढ़ ONE 25 जनवरी 2026।श्री गणेशाय नम:शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
*करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।
इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।
आज का पंचांग
25-Jan-2026
Sri Dungargarh, India
तिथि सप्तमी 11:12 PM
नक्षत्र रेवती 01:36 PM
करण गर, वणिज 12:00 PM
पक्ष शुक्ल
योग सिद्ध 11:45 AM
वार रविवार
सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ
सूर्योदय 07:24 AM
चन्द्रोदय 11:09 AM
चन्द्र राशि मीन 01:36 PM
चन्द्र वास उत्तर
सूर्यास्त 06:08 PM
चन्द्रास्त 00:34 AM
ऋतु शिशिर
हिन्दू मास एवं वर्ष
शक सम्वत 1947 विश्वावसु
काली सम्वत 5126
दिन काल 10:43:25
विक्रम सम्वत 2082
मास अमांत माघ
मास पूर्णिमांत माघ
शुभ और अशुभ समय
शुभ समय
अभिजीत 12:24 PM 01:07 PM
अशुभ समय
दुष्टमुहूर्त 04:42 PM 05:25 PM
कंटक 10:59 AM 11:42 AM
यमघण्ट 01:50 PM 02:33 PM
राहु काल 04:47 PM 06:08 PM
कुलिक 04:42 PM 05:25 PM
कालवेला / अर्द्धयाम 12:24 PM 01:07 PM
यमगण्ड 12:46 PM 02:06 PM
गुलिक काल 03:27 PM 04:47 PM
दिशा शूल
दिशा शूल पश्चिम
चन्द्रबल और ताराबल
ताराबल
अश्विनी, भरणी, रोहिणी, आर्द्रा, पुष्य, आश्लेषा, मघा, पूर्वा फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, अनुराधा, ज्येष्ठा, मूल, पूर्वाषाढ़ा, श्रवण, शतभिषा, उत्तराभाद्रपद, रेवती
चन्द्रबल
वृषभ, मिथुन, कन्या, तुला, मकर, मीन
चोघडिया
उद्वेग 07:24 AM – 08:44 AM
चल 08:44 AM – 10:05 AM
लाभ 10:05 AM – 11:25 AM
अमृत 11:25 AM – 12:46 PM
काल 12:46 PM – 02:06 PM
शुभ 02:06 PM – 03:27 PM
रोग 03:27 PM – 04:47 PM
उद्वेग 04:47 PM – 06:08 PM
शुभ 06:08 PM – 07:47 PM
अमृत 07:47 PM – 09:27 PM
चल 09:27 PM – 11:06 PM
रोग 11:06 PM – 00:46 AM
काल 00:46 AM – 02:25 AM
लाभ 02:25 AM – 04:05 AM
उद्वेग 04:05 AM – 05:44 AM
शुभ 05:44 AM – 07:24 AM
लग्न तालिका
मकर चर
शुरू: 06:48 AM समाप्त: 08:32 AM
कुम्भ स्थिर
शुरू: 08:32 AM समाप्त: 09:59 AM
मीन द्विस्वाभाव
शुरू: 09:59 AM समाप्त: 11:25 AM
मेष चर
शुरू: 11:25 AM समाप्त: 01:01 PM
वृषभ स्थिर
शुरू: 01:01 PM समाप्त: 02:57 PM
मिथुन द्विस्वाभाव
शुरू: 02:57 PM समाप्त: 05:12 PM
कर्क चर
शुरू: 05:12 PM समाप्त: 07:32 PM
सिंह स्थिर
शुरू: 07:32 PM समाप्त: 09:49 PM
कन्या द्विस्वाभाव
शुरू: 09:49 PM समाप्त: 00:05 AM
तुला चर
शुरू: 00:05 AM समाप्त: 02:24 AM
वृश्चिक स्थिर
शुरू: 02:24 AM समाप्त: 04:43 AM
धनु द्विस्वाभाव
शुरू: 04:43 AM समाप्त: 06:48 AM
।। आज का दिन अत्यंत मंगलमय हो ।।
दिन (वार) रविवार को की गई सूर्य पूजा से व्यक्ति को घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन उगते हुए सूर्य को देव को एक ताबें के लोटे में जल, चावल, लाल फूल और रोली डालकर अर्ध्य देवे
इस दिन आदित्य ह्रदय स्रोत्र का पाठ करें एवं यथा संभव मीठा भोजन करें। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है, सूर्य देव को जल देने से पितृ कृपा भी मिलती है।
रविवार के दिन भैरव जी के दर्शन, आराधना से समस्त भय और संकट दूर होते है, साहस एवं बल की प्राप्ति होती है । अत: रविवार के दिन मंदिर में भैरव जी के दर्शन अवश्य करें ।
रविवार के दिन भैरव जी के मन्त्र ” ॐ काल भैरवाय नमः “ या ” ॐ श्री भैरवाय नमः “ की एक माला जाप करने से समस्त संकट, भय दूर होते है, रोगो, अकाल मृत्यु से बचाव होता है, मनवांछित लाभ मिलता है
आप सभी को भगवान सूर्य देव के प्राकट्य दिवस, अचला सप्तमी की हार्दिक शुभकामनायें
माघ माह की शुक्ल पक्ष की सप्तमी को अचला सप्तमी कहा जाता है, इसे पूरे वर्ष की सप्तमीयों में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।
आज ही के दिन ही इस स्रष्टि के प्रत्यक्ष देव भगवान सूर्यदेव ने सात घोड़ो के रथ पर प्रकट होकर पहली बार अपने प्रकाश की किरण से पूरे विश्व को प्रकाशित किया था इसलिए आज के दिन को “रथ सप्तमी” या “रथ आरोग्य सप्तमी” भी कहते है ।
शास्त्रो के अनुसार आरोग्य सुख हेतु आज के दिन सूर्य भगवान की उपासना परम फलदायी है। शास्त्रों के अनुसार अचला सप्तमी के दिन भगवान सूर्य की पूजा करने से सात जन्मो के पाप भी दूर हो जाते है।
आज ही के दिन महर्षि कश्यप और अदिति के संयोग से भगवान सूर्य देव का प्राकट्य हुआ था, इसलिए इस दिन को भगवान सूर्य देव की जन्मतिथि भी कहते है ।
अगर अचला सप्तमी रविवार को अर्थात रविवारीय सप्तमी हो तो इस दिन का महत्त्व और भी अधिक बढ़ जाता है ।
आज के दिन सुबह सूर्योदय से पूर्व किसी पवित्र नदी / तीर्थ में अथवा पानी में गंगाजल डालकर पूर्व दिशा की ओर मुंह करके स्नान करके उगते हुए सूर्य को सात प्रकार के फलों, चावल, तिल, दूर्वा, गुड़, लाल चन्दन आदि को जल में मिलाकर “ॐ घर्णी सूर्याय नम:” मन्त्र का जाप करते हुए अर्घ्य देने और तत्पश्चात आदित्य हर्दय स्त्रोत का पाठ करने से पूरे वर्ष की सूर्य भगवान की पूजा का फल मिलता है।
अचला / रविवारीय सप्तमी के दिन क्रोध बिलकुल भी ना करें, इस दिन सूर्य भगवान का पूजन अवश्य ही करे और मीठा भोजन करें अथवा दोपहर तक नमक ना खाएं ।
इस दिन भगवान सूर्य देव को आक का फूल या पुष्प और गुड़ अर्पित करे ।
सप्तमी तिथि में जन्मा जातक भाग्यशाली, गुणवान, तेजयुक्त होता है उसकी काबिलियत से उसे सभी क्षेत्रो में सम्मान प्राप्त होता है।
सप्तमी का विशेष नाम ‘मित्रपदा’ है। सप्तमी को काले, नीले वस्त्रो को धारण नहीं करना चाहिए।
पण्डित श्रीडूंगरगढ़ ONE