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शिक्षक पहनेंगे फैंसी ड्रेस, खेलेंगे टीटी, शतरंज और दौड़ कूद में लेंगे भाग, दो दिवसीय खेल आयोजन का उद्घाटन, सुथार ने दी स्वस्थ रहने की प्रेरणा

श्रीडूंगरगढ़, 29 अगस्त 2025। श्रीडूंगरगढ़ के आसमान में शिक्षा और खेल का अनूठा संगम देखने को मिला। कस्बे के राउप्रावि डागा छात्र प्रांगण में शुक्रवार को 36वीं शिक्षक क्रीड़ा व सांस्कृतिक प्रतियोगिता का भव्य शुभारंभ हुआ। दो दिवसीय इस आयोजन में उपखंड क्षेत्र के शिक्षक साथी खेल और कला के विभिन्न रूपों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं।

प्रतियोगिता में शिक्षकों का उत्साह देखते ही बनता है। बॉस्केटबॉल, बैडमिंटन और टेबल टेनिस के कोर्ट पर फुर्तीले हाथों से शटल और गेंद हवा में तैर रही है, तो शतरंज की बिसात पर रणनीति और धैर्य का इम्तिहान है। दौड़ में दमखम दिखाने के साथ ही लंबी और ऊंची कूद में शारीरिक क्षमता का प्रदर्शन किया जा रहा है। गोला फेंक में ताकत आजमाई जा रही है, तो फुटबॉल, वॉलीबॉल और कबड्डी के मैदान में स्टेमिना की परीक्षा है।

सिर्फ खेल ही नहीं, सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी शिक्षकों ने अपनी कला का लोहा मनवाया। संगीत की मधुर धुनों से माहौल सराबोर है, तो सामूहिक गान में एकता का संदेश गूंज रहा है। एकाभिनय और विचित्र वेशभूषा प्रतियोगिता में शिक्षकों ने रचनात्मकता और हास्य का रंग घोला।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विश्वकर्मा कौशल बोर्ड के अध्यक्ष रामगोपाल सुथार ने शिक्षकों को खेल को जीवन में अपनाने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि खेल शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए जरूरी है। साथ ही, यह नेतृत्व, अनुशासन और टीम भावना का विकास करता है। उन्होंने सभी प्रतिभागियों को शुभकामनाएं दीं।

विशिष्ट अतिथि सीबीईओ सरोज वीर पूनियां ने शिक्षा और खेल के संयोजन को भावी पीढ़ी के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को शिक्षा के साथ-साथ खेल को भी बढ़ावा देना चाहिए।

कार्यक्रम में यूसीईईओ ममता गोयल, प्राचार्य उमाशंकर सारण समेत कई गणमान्य व्यक्तियों ने मंच की शोभा बढ़ाई। सभी अतिथियों का स्वागत सम्मान किया गया।

प्रतियोगिता में शामिल शिक्षकों का उत्साह और समर्पण देखते ही बनता है। वे न केवल अपने छात्रों को शिक्षा देते हैं, बल्कि खेल और कला के माध्यम से खुद को भी बेहतर बनाते हैं। विद्यालय स्टाफ ने आयोजन व्यवस्था में सक्रिय भूमिका निभाई। कार्यक्रम का संचालन भंवरलाल जाखड़ ने किया।

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