WhatsApp Menu
28 अप्रैल 2026 का पंचांग, साथ जाने और भी कई खास बातें आचार्य श्रीडूंगरगढ़ ONE के साथ।  |  श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र से न्यूज एक्सप्रेस में पढ़ें आज की कुछ खास खबरें एकसाथ  |  बेसहारा गौवंश के लिए बनेगा गौ ट्रोमा सेंटर, किया शिलान्यास।  |  ग्राम रथ अभियान कल से शुरू: 5 विधानसभा क्षेत्रों की ग्राम पंचायतों तक पहुंचेंगे हाईटेक रथ, योजनाओं का होगा व्यापक प्रचार  |  श्रीडूंगरगढ़ मंडी से देखें सभी जिंसो के “आज के भाव”  | 

पिंक फेस्ट में राजस्थानी भाषा की पीड़ा और संवेदनाओं का स्वर

कविताओं में छलका विस्थापन का दर्द, भाषा मान्यता पर हुआ मंथन

डूंगरगढ़ one 7 फरवरी, 2026 श्रीडूंगरगढ़। राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर (आरआईसी) में आयोजित पिंक फेस्ट में राजस्थानी भाषा और साहित्य की गूंज सुनाई दी। फेस्ट के दौरान राजस्थानी भाषा की मान्यता, उसके अस्तित्व और संवेदनाओं को लेकर गहन विमर्श हुआ। लूणकरणसर क्षेत्र के साहित्यकार राजूराम बिजारणियां और डॉ. हरिमोहन सारस्वत ‘रूंख’ ने कविताओं और विचारों के माध्यम से भाषा की ठसक और पीड़ा को प्रभावशाली ढंग से रखा।

शनिवार को राजूराम बिजारणियां के संयोजन में आयोजित परिचर्चा ‘राजस्थानी भाषा साहित्य: इस पड़ाव पर’ में विद्वानों ने भाषा की वर्तमान स्थिति और भविष्य की चुनौतियों पर मंथन किया।

मायड़ भाषा हमारी पहचान: बिजारणियां

वरिष्ठ साहित्यकार वेदव्यास की अध्यक्षता में आयोजित सत्र में संयोजक राजूराम बिजारणियां ने कहा कि मायड़ भाषा जन्मघुट्टी में मिली भाषा है, जिसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता
डॉ. हरिमोहन सारस्वत ‘रूंख’ ने कहा कि राजस्थानी भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक पहचान का आधार है। उन्होंने राजस्थानी कहानी की परंपरा और समकालीन चुनौतियों पर भी विचार रखे।
इस दौरान शारदा कृष्ण ने राजस्थानी महिला लेखन, जबकि मेवाराम गुर्जर ने कविता विधा पर अपने विचार साझा किए।

कविताओं में झलका विस्थापन का दर्द

परिचर्चा से पहले आयोजित पोएट्री सिम्फोजियम में कविताओं ने श्रोताओं को भावुक कर दिया।
राजूराम बिजारणियां ने अपनी कविता “नक्से सूं मिटता गया नांव, म्हारा गांव बणग्या हिरोशिमा अर नागासाकी”
के माध्यम से विस्थापन और उजड़ते गांवों की पीड़ा को उकेरा।

वहीं डॉ. हरिमोहन सारस्वत ‘रूंख’ ने “तूं ही बता नहर, हम पानी लाए थे कि जहर” और ऊंट सीरीज की कविताओं में राजस्थान के प्रतीक ऊंट के घटते अस्तित्व और उससे जुड़ी मानवीय संवेदनाओं को मार्मिक रूप में प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम के अंत में बोधि प्रकाशन की ओर से माया मृग ने अतिथियों और वक्ताओं का सम्मान किया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

home होम layers मोबाइल नंबर mic ऑडियोज़ smart_display शॉर्ट्स theaters शोज़