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लोक अदालत में सुलह की मिसाल: वर्षों से अलग रह रहा दंपति फिर साथ आया, माला पहनाकर गाजे-बाजे से ससुराल ले गए

एडीजे सरिता नौशाद की समझाइश रंग लाई; अधिवक्ताओं की मध्यस्थता से हुआ समझौता

डूंगरगढ़ one 14 मार्च, 2026 श्रीडूंगरगढ़। कस्बे में आयोजित इस वर्ष की पहली राष्ट्रीय लोक अदालत में एक प्रेरणादायक मामला सामने आया, जिसकी पूरे क्षेत्र में चर्चा रही। वर्षों से अलग रह रहे एक दंपति ने लोक अदालत की समझाइश के बाद अपने मतभेद भुलाकर फिर से साथ रहने का निर्णय लिया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार ललित भार्गव बनाम बसंती देवी प्रकरण में दोनों पक्ष लंबे समय से अलग रह रहे थे। मामले में ललित भार्गव की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मोहनलाल सोनी ने मध्यस्थता की। एडीजे कोर्ट में पीठासीन अधिकारी सरिता नौशाद ने राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान दोनों पक्षों को समझाइश दी। न्यायाधीश की पहल और समझाइश से संतुष्ट होकर दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से साथ रहने का निर्णय लिया।

समझौते के बाद अदालत परिसर में भावुक दृश्य देखने को मिला। बसंती देवी को उनके ससुराल पक्ष के लोग माला पहनाकर और गाजे-बाजे के साथ अपने साथ घर ले गए। प्रकरण में अधिवक्ता दीपिका करनाणी ने भी मध्यस्थता का प्रस्ताव रखा, जो सफल रहा।

इस दौरान बार संघ अध्यक्ष एडवोकेट ललित मारू, अपर लोक अभियोजक सोहन नाथ सिद्ध, एडवोकेट राधेश्याम दर्जी, पूर्व बार संघ अध्यक्ष सत्यनारायण प्रजापत, एडवोकेट ओमप्रकाश मोहरा,  गोपाल पारीक, एडवोकेट जेपी मीणा, सामाजिक कार्यकर्ता हरि प्रसाद मोदी, सुंदरलाल सोनी सहित कई अधिवक्ता और आमजन मौजूद रहे। उपस्थित लोगों ने इसे राष्ट्रीय लोक अदालत की बड़ी सफलता बताया।

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