28 अगस्त, 2025 की रात श्रीडूंगरगढ़ के पास राष्ट्रीय राजमार्ग-11 पर कितासर के निकट एक हृदयविदारक घटना घटी। अंधेरी सड़क पर एक बेबस काले गौवंश को एक ट्रक ने टक्कर मार दी। ट्रक तो रफ़्तार पकड़ता हुआ आगे निकल गया, लेकिन वह घायल गौवंश वहीं तड़पता रह गया, मानो जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहा हो।
उस रात, खाटू श्याम के भक्तों की सेवा करके लौट रहे अधिवक्ता मोहनलाल सोनी, सुंदरलाल सोनी (बाना) और रामावतार प्रजापत की नज़र उस घायल गौवंश पर पड़ी। पहली नज़र में उन्हें लगा कि शायद वह अब इस दुनिया में नहीं रहा। पर इंसानियत की डोर ने उन्हें करीब खींचा। जब वे पास पहुंचे, तो उन्होंने पाया कि वह अर्धमूर्छित अवस्था में जीवित है, दर्द से कराह रहा है।
एक पल भी गंवाए बिना, तीनों ने अपनी गाड़ी रोकी और उस असहाय गौवंश को सड़क से हटाने का प्रयास किया। उनकी इस तत्परता को देख, वहां से गुजर रहे अन्य वाहन चालक भी रुक गए और मदद के लिए आगे आए। एकजुट होकर, सभी ने मिलकर उसे सड़क के किनारे एक सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया, जहाँ उसे कुछ राहत मिल सके।
तत्पश्चात, पास के पशु चिकित्सालय से नर्सिंग स्टाफ को बुलाया गया, जिन्होंने तुरंत घायल गौवंश का उपचार शुरू कर दिया। अधिवक्ता मोहनलाल सोनी ने उस रात के अनुभव को साझा करते हुए कहा, “हम तो उसे मृत समझकर सड़क से हटाने गए थे, ताकि अंधेरे में किसी और वाहन की चपेट में आने से बचाया जा सके। लेकिन शायद यह हमारी और उसकी दोनों की किस्मत थी कि वह जीवित बच गया।”
यह घटना, अंधेरे में भी इंसानियत की लौ के जलते रहने का प्रमाण है। यह उस करुणा और संवेदना की कहानी है, जो हमें एक-दूसरे से जोड़े रखती है, और हमें विपरीत परिस्थितियों में भी उम्मीद का दामन थामे रहने की प्रेरणा देती है।