कार्यक्रम की शुरुआत श्री श्याम आराधना परिवार, बीकानेर के सदस्यों ने गणेश वंदना और मधुर भजनों से की। भक्ति की इस धारा को आगे बढ़ाते हुए, नन्हे कलाकारों ने राधा-कृष्ण की मनमोहक झांकियां प्रस्तुत कीं। इन झांकियों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
उत्सव में बाल कृष्ण-राधा प्रतियोगिता, मटकी फोड़ और फूलों की होली जैसे आयोजन हुए, जिनमें बच्चों और युवाओं ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया। सजे हुए दरबार और भगवान कृष्ण के अलौकिक श्रृंगार ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया।
जैसे ही रात के 12 बजे और “नंद के आनंद भयो” के जयकारे गूंजे, वातावरण भक्ति और उल्लास से भर गया। आतिशबाजी के साथ कन्हैया जन्मोत्सव मनाया गया, जिसके बाद प्रसाद का भोग लगाया गया और मटकी फोड़ कार्यक्रम आयोजित हुआ। श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। बॉम्बे कॉलोनी सेवा समिति ने पूरे आयोजन का संचालन किया, जिसमें कॉलोनी के सभी निवासियों ने सक्रिय रूप से सहयोग दिया। इस अवसर पर प्राक्षी कोठारी (पुत्री मीनाक्षी कोठारी, मुम्बई) राधा बनीं।
कस्बे के बिग्गा बास स्थित मंदिर में भी जन्माष्टमी महोत्सव धूमधाम से मनाया गया। मंदिर को रंग-बिरंगे गुब्बारों, फूलमालाओं और आकर्षक लाइटों से सजाया गया था। सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। रात 9 बजे शुरू हुए आयोजन में महिलाओं ने भक्तिमय भजन प्रस्तुत किए, जिन पर भक्त देर रात तक झूमते रहे।
जैसे ही घड़ी ने 12 बजाए, मंदिर परिसर जयकारों से गूंज उठा। थालियां बजाई गईं और जमकर आतिशबाजी हुई। श्रद्धालु “हाथी-घोड़ा-पालकी, जय कन्हैयालाल की” के जयकारे लगाते रहे।
आरती के बाद मंदिर के पुजारी जगदीश आसोपा ने श्रीकृष्ण की लीलाओं पर प्रकाश डाला और जीवन में उनके आदर्शों को अपनाने का संदेश दिया। अंत में प्रसाद स्वरूप पंजीरी, टॉफियां और लड्डू बांटे गए। श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे को जन्माष्टमी की बधाई दी।
इस अवसर पर डूंगरगढ़ कृष्ण भक्ति के रंग में सराबोर दिखा, जहाँ हर तरफ आस्था और प्रेम का सागर उमड़ रहा था।