यह शिविर आगामी 13 सितंबर, 2025 को होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत की तैयारी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था। इसका उद्देश्य उन मामलों को सुलझाना है जो अभी अदालत में नहीं आए हैं, यानी प्री-लिटिगेशन प्रकरण।
शिविर में बार संघ अध्यक्ष सत्यनारायण प्रजापत, अधिवक्ता गोपीराम जानू और किशन स्वामी ने अपनी भूमिका निभाई। उन्होंने पक्षकारों को समझाया और आपसी सहमति से विवादों को सुलझाने का प्रयास किया। वकीलों ने राष्ट्रीय लोक अदालत के महत्व पर प्रकाश डाला और लोगों को बताया कि यह कैसे विवादों को जल्दी और आसानी से निपटाने का एक मंच है।
इस अवसर पर वक्ताओं ने लोक अदालत के लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि लोक अदालत में विवादों का निपटारा आपसी सहमति से होता है, जिससे कटुता कम होती है और संबंध बने रहते हैं। साथ ही, यह प्रक्रिया सरल और त्वरित होती है, जिससे समय और धन की बचत होती है।
कुल 12 लाभार्थियों ने इस प्री-काउंसलिंग शिविर का लाभ उठाया। उन्होंने विवादों के निपटारे की सरल प्रक्रिया और लोक अदालत के लाभों के बारे में जानकारी प्राप्त की।
कार्यक्रम में तालुका विधिक सेवा समिति श्रीडूंगरगढ़ के सचिव जगदीश चौधरी और होमगार्ड शंकरसिंह भी उपस्थित थे। उनकी उपस्थिति ने शिविर को और भी सार्थक बनाया।
यह शिविर राष्ट्रीय लोक अदालत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसका उद्देश्य लोगों को सस्ता और सुलभ न्याय प्रदान करना है। यह पहल निश्चित रूप से विवादों को सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझाने में मददगार साबित होगी।