ग्रामीणों के अनुसार, उन्होंने 181 पर बार-बार शिकायत दर्ज कराई है, लेकिन समस्या का समाधान किए बिना ही शिकायत बंद कर दी जाती है। टंकी की छत पूरी तरह से टूटी हुई है और वह जर्जर अवस्था में है।
मंगलवार को, स्थिति तब और गंभीर हो गई जब एक कुत्ता टंकी में गिर गया। एक युवक ने साहस दिखाते हुए टंकी में उतरकर उसे बाहर निकाला। खुली टंकी में गंदगी जमा है, जिससे ग्रामीणों में आक्रोश है। युवाओं का कहना है कि बार-बार विभाग से गुहार लगाने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि टंकी में गिरने से कोई दुर्घटना होती है या दूषित पानी से कोई बीमार पड़ता है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी विभाग की होगी।
विभागीय अधिकारी कैलाश वर्मा ने बताया कि टंकी की मरम्मत के लिए प्रस्ताव जयपुर भेजा गया है और स्वीकृति मिलने में समय लग रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि एक-दो दिन में अस्थायी तौर पर मरम्मत कार्य शुरू करवा दिया जाएगा।
विभाग की जेईएन साधना मीणा ने स्वीकार किया कि समस्या लंबे समय से है और उच्च अधिकारियों को सूचित कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि कुछ दिन पहले टंकी की सफाई करवाई गई थी, लेकिन फिर से गंदगी जमा हो गई है, जिसे जल्द ही साफ करवाया जाएगा।
गांव के युवा, जिनमें दामोदर, शिवदयाल, राधेश्याम, रूपाराम, अमित, मानाराम, नवरत्न राम, बनवारी और बाबूलाल शामिल हैं, ने विभाग को पत्र लिखकर तत्काल मरम्मत की मांग की है।
यह मामला पेयजल आपूर्ति की बुनियादी सुविधाओं के रखरखाव में लापरवाही और ग्रामीणों की शिकायतों के प्रति उदासीनता को उजागर करता है। अब देखना यह है कि विभाग इस गंभीर मुद्दे पर कितनी जल्दी कार्रवाई करता है और हेमासर के लोगों को स्वच्छ पेयजल कब तक उपलब्ध हो पाता है।