मामला श्रीडूंगरगढ़ के कालू रोड का है, जहाँ शहर से सटी एक महंगी ज़मीन को दो बार बेचने के आरोप हैं। इस संबंध में थाने में धोखाधड़ी के मामले भी दर्ज हैं। उपखण्ड न्यायालय ने भी मामले को संदिग्ध मानते हुए ज़मीन की यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था। इसके बाद, श्रीडूंगरगढ़ उपखण्ड मजिस्ट्रेट न्यायालय ने 11 अगस्त को भी यथास्थिति का आदेश जारी किया।
आश्चर्य की बात है कि इन आदेशों के बावजूद, मौके पर लगातार दस दिनों से ट्रैक्टर और जेसीबी मशीनों से समतलीकरण का कार्य जारी है। यह सब प्रशासन की नाक के नीचे हो रहा है, लेकिन तहसीलदार, पटवारी और प्रशासन ने आँखें मूंद रखी हैं।
कस्बे में आबादी के बीच स्थित खसरा नंबर 681 की 14.0300 हेक्टेयर ज़मीन का यह विवाद है। इस ज़मीन की दो बार रजिस्ट्री होने के कारण खरीददारों और बेचने वालों के बीच विवाद चल रहा है। पहली रजिस्ट्री भूमि मालिक रामरख सांसी के भतीजे सुशील सांसी ने पावर ऑफ अटॉर्नी के माध्यम से गंगाराम नायक के नाम 7 मई 2025 को करवाई थी। लेकिन तकनीकी कारणों से इस ज़मीन का इंतकाल नहीं हो पाया।
फिर, रामरख सांसी ने स्वयं 11 जुलाई 2025 को राजलदेसर निवासी विक्रम हरिजन के नाम दूसरी रजिस्ट्री करवा दी। दूसरी रजिस्ट्री करवाने वाले पक्ष ने ज़मीन पर कब्ज़ा भी ले लिया। इसके बाद, पहली रजिस्ट्री करवाने वाले पक्ष ने ज़मीन पर अपना कब्ज़ा वापस ले लिया और वहाँ ट्रैक्टर चलाकर भूमि समतलीकरण का कार्य शुरू करवा दिया।
विवाद के चलते दूसरी रजिस्ट्री धारक ने न्यायालय की शरण ली। न्यायालय ने ज़मीन पर यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए, लेकिन पहली रजिस्ट्री वाले पक्ष ने इन आदेशों को कथित तौर पर नज़रअंदाज़ कर दिया और मौके पर काम जारी रखा। इसके बाद, दूसरे पक्ष ने संभागीय आयुक्त न्यायालय में अपील की। संभागीय आयुक्त ने भी 18 अगस्त को अपीलकर्ता के पक्ष में सुविधा का संतुलन मानते हुए ज़मीन की यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए और मामले की अगली सुनवाई 24 सितंबर को तय की है।
इस पूरे घटनाक्रम में दो न्यायालयों के आदेशों के बावजूद मौके पर कार्य जारी रहने से क्षेत्र में कानून के राज पर सवाल उठ रहे हैं।
इस मामले पर श्रीडूंगरगढ़ के तहसीलदार श्रीवर्द्धन शर्मा का कहना है, “स्टे के बाद यदि कार्य चल रहा है तो स्टे लेने वाला संबंधित पक्ष कोर्ट ऑफ कंटेम्प्ट की कार्रवाई कर सकता है। मामले की विस्तृत जानकारी स्टाफ से ली जाएगी।”
यह घटनाक्रम ज़मीन के विवादों और न्यायालय के आदेशों के कार्यान्वयन को लेकर कई सवाल खड़े करता है। क्या प्रशासन इस मामले में हस्तक्षेप करेगा और कानून का शासन स्थापित करेगा? यह देखना बाकी है।