2 सितंबर, 2025। श्रीडूंगरगढ़ और आसपास के इलाकों में मंगलवार को लोकदेवता बाबा रामदेव के प्रति आस्था का एक अद्भुत नज़ारा देखने को मिला। चारों ओर श्रद्धा और उल्लास का माहौल था, क्योंकि दूर-दूर से आए श्रद्धालु बाबा के मंदिरों में दर्शन के लिए उमड़ पड़े थे।
मानो पूरे अंचल में एक साथ मेले लग गए हों। मंदिरों में दिन भर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। हर कोई बाबा के चरणों में अपनी मन्नतें अर्पित करने आया था। नारियल और बताशे का भोग लगाकर भक्तों ने अपनी श्रद्धा व्यक्त की।
बिग्गाबास स्थित मंदिर में सुबह विशेष ज्योत आरती का आयोजन किया गया। मंदिर परिसर बाबा के जयकारों से गूंज उठा। शाम होते-होते यहाँ एक मेले का रूप ले लिया, जहाँ बच्चों और महिलाओं के लिए अस्थाई दुकानें सजी थीं, जिन पर उन्होंने जमकर खरीदारी की।
गाँव रिड़ी में भी बाबा के मंदिर में दिनभर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहा। हर कोई बाबा के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करने को आतुर था।
मोमासर में बाबा रामदेव के मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। यहाँ परम्परागत रूप से कुश्ती दंगल का आयोजन किया गया, जिसमें केशरी अर्जुनसर के पहलवान मुकेश गोदारा और किशोर मोमासर के आदित्य विजयी रहे। दुलाराम पूनियां, टोडाराम भामू, मानकचंद बैरा, हरिराम गोदारा, सहीराम गोदारा, राजेश फोगाट, प्रह्लाद भामूं, विजयपाल भाम्मू, धन्नाराम गोदारा सहित गाँव के गणमान्य लोग इस अवसर पर उपस्थित थे। विजेताओं को पुरस्कृत किया गया और कुश्ती प्रेमियों ने दंगल का खूब आनंद लिया।
मेले में खेत-खलिहान में काम आने वाले औजारों, घरेलू सामानों, सब्जियों और फलों की अस्थाई दुकानें लगी थीं। मोमासर और आसपास के गांवों से आए श्रद्धालुओं ने मेले में जमकर खरीदारी की। हालांकि, मंदिर मार्ग की टूटी सड़क को लेकर गाँव के युवाओं ने ग्राम पंचायत की व्यवस्थाओं पर नाराज़गी भी जताई।
इंदपालसर हथाणा जोहड़ में बाबा के मंदिर में मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा समारोहपूर्वक संपन्न हुई। पवन पारीक, हजारीदास स्वामी, श्रवण सिंह, लक्ष्मणसिंह, धनराज सोनी, रामचंद्र सिंह, पुजारी गीधाराम मेघवाल, प्रेम मेघवाल और बड़ी संख्या में ग्रामीण इस शुभ अवसर पर उपस्थित थे।
गाँव बिग्गा में बाबा रामदेव के श्रद्धालु मंदिर में धोक लगाने पहुंचे। पुजारी पदमाराम मेघवाल ने बाबा की विशेष ज्योत आरती संपन्न की। विजय सेवग ने बताया कि इससे पूर्व रात्रि को मंदिर प्रांगण में धूमधाम से जागरण का आयोजन किया गया था।