रविवार को श्रीडूंगरगढ़ में राधाष्टमी का उत्सव बड़ी धूमधाम से मनाया जाएगा। गणेश मंदिर में दोपहर बाद तीन बजे से शाम छह बजे तक राधाष्टमी का विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। राधिका सत्संग मंडली की महिलाएं इस आयोजन को सफल बनाने के लिए तैयारियों में जुटी हैं। उम्मीद है कि नीले परिधानों में सजे-धजे राधा प्रेमी राधा भजनों में डूबकर भक्ति रस का आनंद लेंगे। आयोजकों ने भक्तों से लड्डूगोपाल और नन्हीं बालिकाओं को राधा के रूप में सजाकर लाने का आग्रह किया है।
श्रीडूंगरगढ़ से देशनोक तक की पदयात्रा एक वार्षिक परंपरा का रूप ले चुकी है। श्रीकरणी मित्र मंडल आगामी 24 सितंबर, 2025 को कालू बास स्थित श्रीकरणी मंदिर से देशनोक के लिए दोपहर सवा दो बजे रवाना होगा। यह संघ की 24वीं फेरी होगी। संघ में शामिल होने के इच्छुक करणी भक्तों को पहले अपना नाम पंजीकृत करवाना होगा। इस पदयात्रा में श्रीडूंगरगढ़ कस्बे के अलावा जेतासर, तोलियासर, हेमासर और लखासर गांवों के श्रद्धालु भी शामिल होंगे। किशनलाल नाई और बहादूरसिंह चौहान के अनुसार, पदयात्री देशनोक में माँ करणी के दर्शन करने के बाद बस से खुड़द धाम जाएंगे, जहाँ इंद्र बाईसा के दर्शन कर श्रीडूंगरगढ़ लौटेंगे। जो श्रद्धालु इस संघ में शामिल होना चाहते हैं, वे 9460509282 या 9799985040 पर संपर्क कर अपना पंजीकरण करा सकते हैं।
मालू भवन में साध्वी संगीतश्री जी और डॉ. परमप्रभा जी के सान्निध्य में तेरापंथ समाज ने अष्टम आचार्य कालूगणी का महाप्रयाण दिवस मनाया। साध्वी संगीतश्री जी ने आचार्य कालूगणी के जीवन और शिक्षाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्हें तीन आचार्यों का सान्निध्य मिला। उनका 27 वर्ष का शासनकाल शिक्षा, सेवा, साधना और साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय विकास का साक्षी रहा। उन्होंने कहा कि आचार्य कालूगणी का व्यक्तित्व इतना प्रभावशाली था कि उनके विरोधी भी उनकी वाणी से प्रभावित हुए बिना नहीं रह पाते थे। साध्वी श्री ने सभी श्रावक-श्राविकाओं से आचार्य कालूगणी की शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाने और धर्म के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। इस अवसर पर सुमित बरडिया ने मधुर गीत प्रस्तुत किया, जबकि मंजू झाबक और सुमन पुगलिया ने आचार्य कालूगणी के जीवन पर अपने विचार व्यक्त किए।
शनिवार को बीकानेर निवासी दानदाता कांगला जोशी परिवार गांव कोटासर स्थित श्रीकरणी गौशाला पहुंचा। परिवार के सदस्यों ने गौशाला का निरीक्षण किया और यहाँ की व्यवस्थाओं की सराहना की। महिलाओं ने गौवंश को गुड़ खिलाया। गौशाला समिति ने जोशी परिवार के सभी सदस्यों को दुपट्टा ओढ़ाकर सम्मानित किया। गौशाला में सेवा और दान की भावना को बढ़ावा देने के लिए यह सम्मान किया गया।