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दो पिकअप में 45 बकरियां ठूस-ठूस कर भरी, चार जनों को किया गिरफ्तार

रेगिस्तान की तपती धरती पर, जहाँ जीवन की गति धीमी और शांत होती है, वहाँ बुधवार की शाम श्रीडूंगरगढ़ में कुछ ऐसा हुआ जिसने हर किसी को सोचने पर मजबूर कर दिया। कितासर की ओर से आ रही दो पिकअप गाड़ियों में कुछ संदिग्ध होने की सूचना पुलिस को मिली। सूचना मिलते ही पुलिस हरकत में आई और दो टीमों का गठन किया गया।

पहली टीम, जिसमें हेड कांस्टेबल भगवानाराम, कांस्टेबल पुनीत कुमार और मोहम्मद अशरफ शामिल थे, ने थाने के सामने नाकाबंदी की। दूसरी टीम, जिसकी अगुवाई हेड कांस्टेबल संदीप कुमार कर रहे थे और जिसमें कांस्टेबल विकास और मुकेश शामिल थे, ने झंवर बस स्टैंड पर मोर्चा संभाला।

भगवानाराम की टीम ने कितासर की ओर से आ रही एक पिकअप को रोका। दृश्य देखकर वे भी चौंक गए। पिकअप में दो दर्जन बकरियां ठूस-ठूस कर भरी हुई थीं, मानो उन्हें एक-दूसरे पर पटका गया हो। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए पिकअप को जब्त कर लिया। बालेसर निवासी सदीक पुत्र गफ्फुर खां और इबाईदुल्ला पुत्र हनिफ खान को गिरफ्तार कर लिया गया।

उधर, संदीप कुमार की टीम भी सतर्क थी। उन्होंने दूसरी पिकअप को रोका और उसमें से 21 बकरियां बरामद कीं। इस पिकअप को भी जब्त कर लिया गया। जोड, भाप निवासी मकसुद पुत्र नेक मोहम्मद और शकूर पुत्र बच्चुखां निवासी बिराई को भी गिरफ्तार कर लिया गया।

पुलिस ने दोनों ही मामलों में पशु क्रूरता अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया है। यह घटना कई सवाल खड़े करती है। क्या इन बकरियों को इतनी बेरहमी से ले जाना ज़रूरी था? क्या उनके प्रति थोड़ी भी संवेदनशीलता नहीं दिखाई जा सकती थी?

यह घटना हमें सोचने पर मजबूर करती है कि हम जानवरों के प्रति कैसा व्यवहार कर रहे हैं। क्या हम उन्हें सिर्फ़ वस्तु समझते हैं या उनके जीवन का भी कोई महत्व है? यह एक ऐसा प्रश्न है जिस पर हर किसी को गंभीरता से विचार करना चाहिए।

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