तिरंगे में लिपटी शहीद की पार्थिव देह जब सैन्य सम्मान के साथ आर्मी के जवानों के कंधों पर, पुराना बस स्टैंड से घुमचक्कर की ओर ले जाई जा रही थी, तो वातावरण देशभक्ति के नारों से गूंज उठा। सेना के जवान और स्थानीय नागरिक एक साथ कदमताल करते हुए चल रहे थे। हर नारे ने उपस्थित जनसमूह के हृदय में गर्व और शोक की मिश्रित भावनाएं भर दीं।
पूरे शहर में जैसे जनसैलाब उमड़ पड़ा था। संकरी गलियां लोगों से खचाखच भरी हुई थीं, और आसपास की इमारतों की छतों पर भी लोग शहीद के अंतिम दर्शन के लिए खड़े थे। हर कोई अपने वीर सपूत को अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित करने को व्याकुल था। व्यापारी और सैकड़ों युवा हाथों में तिरंगा लिए इस शोकयात्रा में शामिल हुए।
शहीद को विदाई देते हुए लोगों के हृदय भारी थे, और आंखों से आंसू बह रहे थे। पुष्पचक्र अर्पित करते समय, उपस्थित जनसमूह की भावनाएं उमड़ पड़ीं।
इस अंतिम यात्रा में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता और प्रशासनिक अधिकारी भी शामिल हुए। भाजपा, कांग्रेस और सीपीएम के वरिष्ठ नेताओं, जिनमें विधायक ताराचंद सारस्वत, पूर्व विधायक गिरधारीलाल महिया, पूर्व विधायक मंगलाराम गोदारा, श्री विश्वकर्मा कौशल विकास बोर्ड के अध्यक्ष रामगोपाल सुथार, विमल भाटी, विवेक माचरा, केसराराम गोदारा तथा अन्य पार्षद और पदाधिकारी शामिल थे, ने शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित की।
स्थानीय प्रशासन की ओर से तहसीलदार श्रीवर्द्धन शर्मा, थानाधिकारी जितेंद्र स्वामी, नायब तहसीलदार सरजीत कुमार धायल सहित अनेक अधिकारी उपस्थित थे। किसान सभा और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी पुष्पचक्र अर्पित कर शहीद को नमन किया।
इस अवसर पर श्रीडूंगरगढ़ ने अपने वीर सपूत को नम आंखों से विदाई दी, और शहीद राकेश जाखड़ की शहादत को हमेशा याद रखने का संकल्प लिया। यह घटना न केवल एक व्यक्ति की क्षति है, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए एक गहरा आघात है, जो देशभक्ति और बलिदान की भावना को भी उजागर करता है।