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सांगरी को लील गई बेमौसम चली ठंडी हवा, फाल के समय होती है गर्मी व गर्म हवा की जरुरत

श्रीडूंगरगढ़ ONE 9 अप्रैल 2026।
क्षेत्र के पत्रकार महावीर सारस्वत ठुकरियासर की राजस्थान पत्रिका में गुरूवार को प्रकाशित विशेष रिपोर्ट

इस बार लगातार बदलते मौसम के मिजाज से राजस्थान का मेवा और सब्जी का राजा कहलाने वाली सांगरी फली को बेमौसम की बरसात एवं ठंडी हवाओं ने खत्म कर दिया है। पिछले कुछ सालों से हो रहे जलवायु परिवर्तन से एक पारंपरिक, पौष्टिक और स्वादिष्ट कैर के साथ बनने वाली राजस्थान की सूखी सब्जी सांगरी के अस्तित्व पर खतरा पैदा हो गया है।
सांगरी (खेजड़ी) के लिए उपयुक्त जलवायु और तापमान:
खेजड़ी के पेड़ से प्राप्त सांगरी, जिसे ‘रेगिस्तान का सुनहरा फल’ कहा जाता है। उद्यान विभाग के सहायक निदेशक मुकेश गहलोत के अनुसार यह शुष्क, अर्ध शुष्क और गर्म जलवायु में सबसे अच्छी तरह पनपती है। इसका पेड़ खेजड़ी राजस्थान की अत्यधिक गर्मी (पैंतालीस से पचास डिग्री सेल्सियस), सूखे और कम वर्षा (100 से 400 मिमी) को सहन करने में सक्षम है, जो इसे सबसे प्रतिरोधी किस्म बनाता है। यह रेतीली मिट्टी में सबसे अच्छा विकास करती है। सांगरी के लिए सबसे उपयुक्त स्थान राजस्थान के मरुस्थलीय क्षेत्र हैं, जहां का मौसम शुष्क और विषम होता है।
सांगरी के खराब होने के मुख्य कारण:
पिछले कुछ सालों से जलवायु परिवर्तन मारवाड़ी मेवों के लिए विष का काम कर रहा है। हालांकि जलवायु परिवर्तन के साथ ही खेजड़ी के पेड़ों की अंधाधुंध कटाई, खेतों में अंधाधुंध रासायनिक छिड़काव, कारखानों की स्थापना ने इसकी गुणवत्ता को प्रभावित किया है। वहीं कृषि विभाग के अनुसार अचानक तापमान में बदलाव, बेमौसम बारिश, अधिक नमी, इरिओफिस कीट का प्रकोप और फंगस संक्रमण भी सांगरी की गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं। इससे फूल व मींझर में संक्रमण पैदा हो जाता है और सांगरी की जगह गांठें (गिरडू) बन जाती हैं। यह फली के विकास को रोक देता है और उत्पादन में 50-70 प्रतिशत तक की कमी हो जाती है।
ग्रामीण आय का स्त्रोत:
राज्य वृक्ष के रूप में जानी जाने वाली खेजड़ी सांगरी के फलों से लकदक रहती है। लेकिन जलवायु परिवर्तन के कारण इनके फूल फली में तब्दील होने से पहले ही गांठ (गिरडू)बन रहे हैं। जिससे इनकी पैदावर पिछले कुछ सालों में घटकर एक चौथाई हो गई है। ग्रामीण क्षेत्र में सांगरी आय का अच्छा स्त्रोत है। इसे कई परिवारों के लोग खेतों से सांगरी इकट्ठी कर आजीविका का जरिया बनाते हैं। इसकी गीली फली 150-200 रुपए किलोग्राम और सूखे फल 1500 से 2000 रुपए किलोग्राम तक बिक जाता है।
विश्व भर में है कैर-सांगरी की धमक:
सांगरी की फली राजस्थानी थाली की लजीज डिश में शामिल है। राजस्थानी प्रवासियों ने इन्हें दुनिया भर में पहचान दिलाई है। कैर-सांगरी राजस्थान का पारंपरिक व्यंजन है और शादियों व त्योहारों में विशेष रूप से परोसी जाने वाली सब्जी है। इसका अचार व सब्जियां विश्व भर में प्रसिद्ध है। इसके साथ ही राजस्थान में आने वाले विदेशी पर्यटकों की पहली पसंद कैर-सांगरी है। रेस्टोरेंट में प्रमुखता से कैर-सांगरी व पंचकूटा की मांग रहती है।

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