श्रीडूंगरगढ़ श्रीडूंगरगढ़ ONE 14 जनवरी 2026। श्री गणेशाय नम:शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
*करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।
इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।
आज का पंचांग
14-Jan-2026
Sri Dungargarh, India
तिथि एकादशी 05:55 PM
नक्षत्र अनुराधा 03:04 AM
करण बालव, कौलव 05:55 PM
पक्ष कृष्ण
योग गण्ड 07:55 PM
वार बुधवार
सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ
सूर्योदय 07:27 AM
चन्द्रोदय 04:37 AM
चन्द्र राशि वृश्चिक
चन्द्र वास उत्तर
सूर्यास्त 05:59 PM
चन्द्रास्त 02:03 PM
ऋतु शिशिर
हिन्दू मास एवं वर्ष
शक सम्वत 1947 विश्वावसु
काली सम्वत 5126
दिन काल 10:32:07
विक्रम सम्वत 2082
मास अमांत पौष
मास पूर्णिमांत माघ
शुभ और अशुभ समय
शुभ समय
अभिजीत
अशुभ समय
दुष्टमुहूर्त 12:21 PM 01:04 PM
कंटक 04:34 PM 05:16 PM
यमघण्ट 09:33 AM 10:15 AM
राहु काल 12:43 PM 02:02 PM
कुलिक 12:21 PM 01:04 PM
कालवेला / अर्द्धयाम 08:09 AM 08:51 AM
यमगण्ड 08:46 AM 10:05 AM
गुलिक काल 11:24 AM 12:43 PM
दिशा शूल
दिशा शूल उत्तर
चन्द्रबल और ताराबल
ताराबल
अश्विनी, कृत्तिका, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, चित्रा, विशाखा, अनुराधा, ज्येष्ठा, मूल, उत्तराषाढ़ा, धनिष्ठा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद, रेवती
चन्द्रबल
वृषभ, मिथुन, कन्या, वृश्चिक, मकर, कुम्भ
चोघडिया
लाभ 07:26 AM – 08:45 AM
अमृत 08:45 AM – 10:04 AM
काल 10:04 AM – 11:23 AM
शुभ 11:23 AM – 12:42 PM
रोग 12:42 PM – 02:02 PM
उद्वेग 02:02 PM – 03:21 PM
चल 03:21 PM – 04:40 PM
लाभ 04:40 PM – 05:59 PM
उद्वेग 05:59 PM – 07:40 PM
शुभ 07:40 PM – 09:21 PM
अमृत 09:21 PM – 11:02 PM
चल 11:02 PM – 00:42 AM
रोग 00:42 AM – 02:23 AM
काल 02:23 AM – 04:04 AM
लाभ 04:04 AM – 05:45 AM
उद्वेग 05:45 AM – 07:26 AM
लग्न तालिका
धनु द्विस्वाभाव
शुरू: 05:27 AM समाप्त: 08:10 AM
मकर चर
शुरू: 08:10 AM समाप्त: 09:13 AM
कुम्भ स्थिर
शुरू: 09:13 AM समाप्त: 10:42 AM
मीन द्विस्वाभाव
शुरू: 10:42 AM समाप्त: 12:08 PM
मेष चर
शुरू: 12:08 PM समाप्त: 01:44 PM
वृषभ स्थिर
शुरू: 01:44 PM समाप्त: 03:40 PM
मिथुन द्विस्वाभाव
शुरू: 03:40 PM समाप्त: 05:55 PM
कर्क चर
शुरू: 05:55 PM समाप्त: 08:15 PM
सिंह स्थिर
शुरू: 08:15 PM समाप्त: 10:32 PM
कन्या द्विस्वाभाव
शुरू: 10:32 PM समाप्त: 00:48 AM
तुला चर
शुरू: 00:48 AM समाप्त: 03:08 AM
वृश्चिक स्थिर
शुरू: 03:08 AM समाप्त: 05:27 AM
आज वर्ष 2026 की प्रथम एकादशी माघ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी है । माघ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को षटशिला एकादशी कहते है। षटशिला एकादशी के दिन तिल का अत्यंत महत्व है ।
षटशिला एकादशी के दिन छ: प्रकार से तिलों का प्रयोग होता है इसलिए इस एकादशी को षटतिला एकादशी कहा जाता है।
शास्त्रों के अनुसार षटशिला एकादशी के दिन प्रात: तिल का उबटन, तिल के जल से स्नान, जल में तिल मिलाकर सूर्य भगवान को अर्घ्य देना, तिल से हवन, तिल का ब्राह्मण को दान, तिल को भोजन व पानी में मिलाकर ग्रहण करने से भगवान श्री विष्णु प्रसन्न होते है जातक को अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।
षटशिला एकादशी के दिन पंचामृत में तिल मिलाकर अथवा जल में तिल मिलाकर भगवान श्री विष्णु जी / श्री कृष्ण जी को स्नान कराना चाहिए।
हिन्दू धर्म में मकर संक्रांति का महत्त्व बहुत अधिक बताया गया है । मकर संक्रांति का पर्व सूर्य के उत्तरायण होने की खुशी में बहुत ही उमंग व उत्साह से मनाया जाता है।
इस दिन भगवान सूर्य की पूजा करने का विशेष विधान है।
एक वर्ष में 12 संक्रांतियाँ होती है जिसमें छह संक्रांतियाँ उत्तरायण की और छह दक्षिणायन की कहलाती है।
शास्त्रों के अनुसार सूर्यदेव जा धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते है तो मकर संक्रांति मनाई जाती है ।
* आयन दो माने जाते है उत्तरायण और दक्षिणायन , ग्रंथों में उत्तरायण की अवधि को देवताओं का दिन तथा दक्षिणायन के समय को देवताओं की रात्रि कहा गया है ।
* इस प्रकार मकर संक्रांति देवताओं का प्रभात काल माना गया है । इस दिन स्नान, दान, जप, तप, श्राद्ध तथा अनुष्ठान आदि का अत्यधिक महत्व है । पुरानी मान्यता है संक्रांति पर किया गया दान साधारण दान से हजार गुना पुण्य प्रदान करता है ।
पंचांग के अनुसार सूर्य देव 14 जनवरी को दोपहर 03.13 परधनु राशि से मकर राशि में प्रवेश कर रहे है 14 जनवरी को मकर संक्रांति का पर्व मना रहे है, मकर संक्रांति के दिन चावल / खिचड़ी का विशेष महत्त्व होता है और एकादशी के कारण इस दिन चावल का किसी भी रूप में प्रयोग वर्जित है इसलिए खिचड़ी अथवा अन्नदान परसों करे !
* मकर संक्रांति के दिन प्रात: स्नान से पहले तिल का उबटन लगाना,
* जल में तिल डालकर उस तिल के जल से स्नान करना,
* इस दिन भगवान सूर्य देव को जल में तिल ड़ालकर अर्घ्य देना, पितरो को जल में तिल अर्पण करना,
* मकर संक्रांति के दिन स्नान, पूजा के बाद तिल का योग्य ब्राह्मण को दान करना,
* इस दिन यज्ञ में घी मिश्रित तिल की आहुति देना, एवं
* मकर संक्रांति के तिल तिल से बना भोजन करना अथवा तिल के पदार्थो का सेवन करना ।
पण्डित श्रीडूंगरगढ़ ONE