कभी शांत रहने वाला लाछड़सर गांव इन दिनों धरने का केंद्र बना हुआ है। ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ता ही जा रहा है, और उनकी मांग है – वर्षों से लंबित सड़क का निर्माण।
आज, मोमासर गांव में संघर्ष समिति के सदस्यों ने एक आम बैठक बुलाई। बैठक का उद्देश्य था – अपनी मांग को और अधिक मजबूती से उठाना। वक्ताओं ने एक स्वर में सड़क की दुर्दशा का वर्णन किया। उनका कहना था कि सड़क इतनी जर्जर हो चुकी है कि इस पर चलना भी दूभर हो गया है। उन्होंने संघर्ष को और तेज करने का आह्वान किया।
बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि सोमवार को जिला कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपा जाएगा। ग्रामीणों का कहना है कि यदि उन्हें सकारात्मक आश्वासन नहीं मिला, तो आड़सर, मोमासर और लाछड़सर के ग्रामीण एकजुट होकर सड़क पर आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
लाछड़सर के सरपंच प्रतिनिधि जगदीश सहू और सत्तासर के सरपंच सुनील मलिक ने सभा को संबोधित करते हुए बताया कि सड़क निर्माण के लिए टेंडर भी हो गए थे, लेकिन अप्रत्याशित रूप से शुक्रवार को उन्हें निरस्त कर दिया गया। इस खबर ने ग्रामीणों के आक्रोश को और भड़का दिया है।
धन्नाराम गोदारा, बीरबल पूनियां, विजयपाल भामूं, ओमप्रकाश भामूं और परमेश्वर नैण जैसे स्थानीय नेताओं ने भी सभा को संबोधित किया और ग्रामीणों को एकजुट रहने का आह्वान किया। सभा में कुशलाराम गोदारा, मालाराम नाई, सांवरमल दर्जी, खेताराम सियाग, सोहन बेदा और गोपी गोदारा सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे। हर चेहरे पर निराशा और आक्रोश स्पष्ट झलक रहा था।
आंदोलनकारियों ने एक स्वर में आंदोलन को तेज करने की बात कही। अब देखना यह है कि प्रशासन उनकी मांगों पर कितनी जल्दी ध्यान देता है और क्या यह आंदोलन एक निर्णायक मोड़ लेता है। सड़क निर्माण की यह मांग अब केवल एक इलाके की नहीं, बल्कि एक समूचे क्षेत्र की उम्मीदों का प्रतीक बन चुकी है।