राज्य निर्वाचन आयुक्त मधुकर गुप्ता ने इस सिलसिले में कहा कि हाईकोर्ट के आदेशों का पालन करते हुए जल्द ही निकाय और पंचायत चुनाव करवाए जाएंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन निकायों और पंचायती राज संस्थाओं का कार्यकाल पूरा हो गया है या अगले दो महीनों में पूरा होने वाला है, वहां चुनाव कराए जाएंगे।
इस बीच, ‘वन स्टेट, वन इलेक्शन’ के मुद्दे पर गुप्ता ने कहा कि यह विचार फिलहाल व्यावहारिक नहीं है। उन्होंने कहा कि जब तक संविधान में संशोधन नहीं हो जाता, तब तक इसे लागू करना संभव नहीं है। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि जिन पंचायती राज संस्थाओं और निकायों के पांच साल पूरे नहीं हुए हैं, उनके चुनाव समय से पहले कराने का कोई प्रावधान नहीं है।
गुप्ता ने जोर देकर कहा कि कानूनी प्रावधान स्पष्ट हैं कि पंचायती राज संस्थाओं और नगर निकायों के चुनाव हर 5 साल में होने चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि चुनाव में देरी होने पर अन्य राज्यों में भी हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप किया है और इसी तरह के आदेश दिए हैं।
उधर, राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा ‘वन स्टेट, वन इलेक्शन’ को नकारने के बाद पंचायत राज मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि इस मामले में सामूहिक निर्णय लिया जाएगा और उसी के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि, पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्य, प्रधान और जिला प्रमुख के चुनाव की घोषणा अभी नहीं होगी। ऐसा अनुमान है कि 21 जिला परिषदों और 222 पंचायत समितियों के सदस्यों और प्रधानों, जिला प्रमुखों का कार्यकाल नवंबर-दिसंबर में खत्म होने के कारण उनकी घोषणा बाद में होगी।
इस बीच, एक सवाल यह भी है कि सरकार द्वारा किए गए परिसीमन का क्या होगा। इस पर राज्य निर्वाचन आयुक्त ने साफ किया है कि सरकार जिन नई पंचायती राज संस्थाओं और शहरी निकायों के गठन और वार्डों के परिसीमन का नोटिफिकेशन जारी कर देगी, उनके चुनाव नए परिसीमन के हिसाब से होंगे। अन्यथा, चुनाव पुराने इलाकों के हिसाब से ही कराए जाएंगे।
ऐसे में, राजस्थान में चुनावों की आहट सुनाई दे रही है और सभी की निगाहें राज्य निर्वाचन आयोग पर टिकी हैं, जो जल्द ही चुनावी बिगुल बजाने वाला है।