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पीएम कुसुम योजना, तीन हजार सोलर पंप लेगेंगे 60 प्रतिशत अनुदान पर, पढें पूरी खबर।

यह बदलाव यूं ही नहीं आया है। सरकार की पीएम कुसुम योजना (कंपोनेंट-बी) ने इस हरित क्रांति को गति दी है। इस योजना का उद्देश्य किसानों को डीजल और बिजली पर निर्भरता कम करके सौर ऊर्जा अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है। अब तक जिले में 500 सौर ऊर्जा पंप संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं, और वर्ष 2025-26 तक 3,500 पंप स्थापित करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है।

उद्यान विभाग के सहायक निदेशक मुकेश गहलोत ने बताया कि किसानों को तीन, पांच और साढ़े सात हॉर्स पावर (एचपी) क्षमता के पंपों पर अनुदान दिया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान में कोई भी आवेदन लंबित नहीं है। इस योजना के तहत किसानों को 60 प्रतिशत तक अनुदान मिलता है, जबकि अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग के किसानों को अतिरिक्त 45,000 रुपये का अनुदान भी दिया जाता है। शेष राशि किसान को स्वयं वहन करनी होती है।

अनुदान के बाद, किसानों को तीन एचपी पंप के लिए लगभग 97,750 से 1,01,124 रुपये, पांच एचपी पंप के लिए 1,27,385 से 1,29,221 रुपये और साढ़े सात एचपी पंप के लिए 1,78,893 से 1,81,437 रुपये तक का भुगतान करना होगा।

उपनिदेशक उद्यान रेणु वर्मा ने किसानों से इस योजना का लाभ उठाने के लिए आवेदन करने का आह्वान किया है। उन्होंने बताया कि किसान नजदीकी ई-मित्र केंद्र या राज किसान साथी पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के लिए नवीनतम जमाबंदी और नक्शा, जल स्रोत और डीजल पंप उपयोग संबंधी पत्र, बिजली कनेक्शन न होने का शपथ पत्र और अनुमोदित फर्म का चयन आवश्यक है। अधिक जानकारी के लिए किसान कार्यालय उपनिदेशक उद्यान या संबंधित सहायक कृषि अधिकारी/कृषि पर्यवेक्षक उद्यान से संपर्क कर सकते हैं।

सौर ऊर्जा पंप लगाने के कई लाभ हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह स्वच्छ और अक्षय ऊर्जा का स्रोत है, जो पर्यावरण संरक्षण में सहायक है। इसके अलावा, किसानों को सिंचाई के लिए बिजली कनेक्शन या डीजल की आवश्यकता नहीं होती है, जिससे उनका खर्च घटता है। समय पर और पर्याप्त पानी मिलने से फसलों की पैदावार भी बढ़ती है।

जहाँ डीजल पंप पर रोजाना खर्च होता है, वहीं सोलर पंप एक बार लगने के बाद वर्षों तक मुफ्त ऊर्जा देता है। इसके अलावा, सरकार पंप की लागत का एक बड़ा हिस्सा वहन करती है, जिससे किसानों पर आर्थिक बोझ कम होता है। बिजली की कटौती या ट्रांसफार्मर की समस्याओं से भी मुक्ति मिलती है, और किसान अपनी सुविधानुसार सिंचाई कर सकते हैं।

कुल मिलाकर, श्रीडूंगरगढ़ में सौर ऊर्जा से सिंचाई किसानों के लिए एक वरदान साबित हो रही है। यह न केवल उनकी आर्थिक स्थिति को सुधार रही है, बल्कि पर्यावरण को भी सुरक्षित रखने में मदद कर रही है। यह एक ऐसा कदम है जो न केवल आज के लिए, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी फायदेमंद साबित होगा।

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