पीड़िता, जिसकी उम्र 22 वर्ष है, ने श्रीडूंगरगढ़ थाने में एक रिपोर्ट दर्ज कराई है। रिपोर्ट में उसने बीकानेर के लालगढ़ क्षेत्र स्थित प्रतापबस्ती के निवासी योगेश कुमार, उसके पिता ओमप्रकाश लूहार और माता तारादेवी पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
पीड़िता के अनुसार, उसकी और योगेश की मुलाकात एक विवाह समारोह में हुई थी, जहां योगेश ने उससे उसका फोन नंबर ले लिया। धीरे-धीरे उनकी बातें शुरू हुईं और योगेश उससे मिलने श्रीडूंगरगढ़ आने लगा। इस दौरान योगेश ने युवती के कुछ तस्वीरें भी खींचीं।
पीड़िता का आरोप है कि योगेश ने इन्हीं तस्वीरों का इस्तेमाल करते हुए उसे ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया। उसने तस्वीरें वायरल करने की धमकी देकर उसे बीकानेर बुलाया और उसके साथ दुष्कर्म किया।
पीड़िता ने पुलिस को बताया कि 15 जून 2025 को योगेश ने उसे फिर बीकानेर बुलाया और पांच-छह स्टाम्प लगे और सादे कागजों पर हस्ताक्षर करवाए। वह उसे कोर्ट भी ले गया, जहां उसके माता-पिता और बहन भी मौजूद थे। वहां किसी वकील से कुछ मोहरें इत्यादि लगाकर कागज तैयार करवाए गए और फिर उसे अपने घर ले जाकर एक कमरे में बंद कर दिया गया।
पीड़िता का आरोप है कि योगेश लगातार उसके साथ दुष्कर्म करता रहा और भागने की कोशिश करने पर योगेश सहित उसके माता-पिता और बहन उसके साथ मारपीट करते थे।
7 अगस्त 2025 को रक्षाबंधन पर जब योगेश घर से बाहर गया, तो पीड़िता मौका देखकर बीकानेर से भागकर अपने घर पहुंची और परिजनों को पूरी घटना बताई।
बताया जाता है कि पीड़िता की माँ ने योगेश को फटकार लगाई और उससे विवाह करने की बात कही, जिस पर योगेश ने एक-दो दिन में विवाह करने का आश्वासन दिया। हालांकि, 15 अगस्त को योगेश ने उससे विवाह करने से इनकार कर दिया और उसे लिव-इन के कागज बनाए होने की बात कही।
श्रीडूंगरगढ़ पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच एसआई मोहनलाल को सौंप दी है। यह मामला रिश्तों के बदलते स्वरूप और आधुनिक समाज में पनप रहे अपराधों पर एक गंभीर सवाल खड़ा करता है। अब देखना यह है कि पुलिस की जांच में इस मामले में क्या नया मोड़ आता है और पीड़िता को न्याय कैसे मिलता है।