WhatsApp Menu
धीरदेसर चोटियान- मोमासर 12 किमी सड़क को मिली मंजूरी, ग्रामीणों ने विधायक ताराचंद सारस्वत का किया सम्मान  |  श्री ओसवाल पंचायत संस्था का जे.पी. हॉल राजूदेवी पारख द्वारा लोकार्पित, देखें सभी फ़ोटो  |  बीकानेर में फरवरी का राशन अब 15 मार्च तक मिलेगा  |  29 मार्च को श्रीडूंगरगढ़ से खाटूश्यामजी के लिए रवाना होगी विशाल डाक ध्वजा यात्रा  |  बीदासरिया में युवाओं का बड़ा संकल्प: मृत्यु भोज और शराब को कहा अलविदा  | 

न्यायालय की कर डाली अवहेलना, अब शुरू हुई कोर्ट ऑफ कंटेंप्ट की कार्रवाई।

श्रीडूंगरगढ़ से लगभग [दूरी] किलोमीटर दूर, धीरदेसर चोटियान गाँव में एक शांत क्रांति चल रही है। यह क्रांति शराब के उस जहर के खिलाफ है, जो धीरे-धीरे गाँव के युवाओं को अपराध की ओर धकेल रहा है। गाँव के बुजुर्गों, महिलाओं और जागरूक युवाओं ने मिलकर शराब के ठेके को बंद करवाने का बीड़ा उठाया है।

यह आंदोलन आज से नहीं, बल्कि 350 दिनों से अधिक समय से चल रहा है। गाँव वालों का कहना है कि उन्होंने हर संभव लोकतांत्रिक तरीका अपनाया। ग्राम पंचायत की आम सभा में प्रस्ताव पारित किया गया, धरना प्रदर्शन किए गए और नीचे से लेकर ऊपर तक सभी अधिकारियों को विरोध ज्ञापन सौंपे गए।

ग्रामीणों का आरोप है कि शराब ठेकेदारों के दबाव में प्रशासन ने उनकी मांगों को अनसुना कर दिया। थक-हारकर ग्रामीणों ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।

गत 23 अप्रैल, 2025 को जोधपुर उच्च न्यायालय ने ग्रामीणों की मांग को जायज ठहराते हुए आबकारी आयुक्त उदयपुर और जिला कलेक्टर बीकानेर को नियम 1975 के तहत दो महीने में शराबबंदी पर मतदान करवाने का आदेश दिया।

गाँव के ही युवा और जोधपुर उच्च न्यायालय के अधिवक्ता राकेश चोटिया बताते हैं कि इसके बाद भी आबकारी विभाग और जिला कलेक्टर ने माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों का पालन नहीं किया। इस पर आबकारी आयुक्त उदयपुर और जिला कलेक्टर बीकानेर को कोर्ट ऑफ कंटेम्प्ट के नोटिस भी दिए गए।

लेकिन, ग्रामीणों के धैर्य ने अभी तक हार नहीं मानी है। उन्होंने एक बार फिर माननीय न्यायालय के समक्ष अवमानना याचिका दाखिल की।

गत 30 जुलाई को उच्च न्यायालय ने इस याचिका को स्वीकार करते हुए दोनों अधिकारियों और राज्य सरकार को शो-कॉज नोटिस जारी किया है और उनसे जवाब तलब किया है।

धीरदेसर चोटियान के ग्रामीणों का यह संघर्ष केवल एक गाँव की कहानी नहीं है। यह उन सभी लोगों की कहानी है, जो अपने समाज को बेहतर बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह उस अटूट विश्वास की कहानी है, जो हमें सिखाती है कि न्याय के लिए आवाज उठाना कभी भी व्यर्थ नहीं जाता। अब देखना यह है कि न्यायालय इस मामले में आगे क्या रुख अपनाता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

home होम layers मोबाइल नंबर mic ऑडियोज़ smart_display शॉर्ट्स theaters शोज़