यह सम्मेलन, जिसमें छात्र शक्ति के भविष्य की दिशा तय करने वाले मुद्दों पर विमर्श हुआ, कई मायनों में महत्वपूर्ण रहा। राजनीतिक गलियारों में भी इस कार्यक्रम की चर्चा रही, जहाँ युवा शक्ति की सक्रिय भागीदारी और उनके विचारों को महत्व दिया गया।
सम्मेलन में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री सुनील बंसल, प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़, प्रदेश उपाध्यक्ष नाहर सिंह जोधा, प्रदेश महामंत्री जितेंद्र गोठवाल, श्रवण बगड़ी, प्रदेश संयोजक सुनील भार्गव, सह संयोजक महेंद्र राठौड़, उमेश दत्त, अर्जुन तिवारी, श्याम राजावत और शंकर गोरा जैसे वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति ने युवाओं को प्रोत्साहित किया।
बीकानेर संभाग से भी बड़ी संख्या में छात्र नेताओं ने इस सम्मेलन में भाग लिया। डूंगर कॉलेज, बीकानेर के पूर्व अध्यक्ष मांगीलाल गोदारा ने संभाग की छात्र शक्ति की ओर से “एक राष्ट्र, एक चुनाव” के प्रस्ताव का अनुमोदन किया।
विभिन्न विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के छात्र संघ पदाधिकारियों ने भी कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। बीकानेर से आए प्रमुख छात्र नेताओं में मांगीलाल गोदारा, सुनिल मेघवाल, भवानी पालीवाल, कान नाथ गोदारा, अतुलांन्द, मुकेश पूनिया (महासचिव), बिरबल कुमावत (पूर्व महासचिव), श्रवण कुमार कुमावत (महासचिव), मानवेन्द्र सिंह, मोहित बापेऊ, गजानंद ओझा, अशोक बिश्नोई, पवन स्वामी, शुभम शर्मा, प्रदीप सोनी, अशोक तावनिया, बजरंग बिश्नोई, अजय जिनगर, प्रखर मित्तल, मदन गोपाल सोनी, आसकरण ओझा, निशांत गौड़, गजेन्द्र सिंह भाटी, विजय पाल कुकणा, सुभाष वाल्मीकि, चिराग तनेजा, विनायक पारिक, भंवरलाल बारूपाल, उत्तम नाथ सिद्ध, धर्मवीर सिंह नथावत, पूनमचंद पूनिया, अभिलाष, हुलाश भाटी जैसे अनेक युवा शामिल थे।
सम्मेलन में उपस्थित छात्र नेताओं ने “एक राष्ट्र, एक चुनाव” के प्रस्ताव का समर्थन करते हुए इसे लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उनका मानना था कि यह पहल देश के विकास और स्थिरता के लिए आवश्यक है।
कुल मिलाकर, यह सम्मेलन छात्र नेताओं के लिए एक ऐसा मंच साबित हुआ जहाँ उन्होंने न केवल अपने विचार व्यक्त किए बल्कि राष्ट्रीय महत्व के एक विषय पर अपनी सक्रिय भागीदारी भी सुनिश्चित की। अब देखना यह है कि छात्र शक्ति की यह आवाज भविष्य में क्या गुल खिलाती है।