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श्रीडूंगरगढ़ से न्यूज एक्सप्रेस में पढें कुछ खास खबरें एकसाथ

आज श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम हुए। जहां एक ओर गोपालसर गांव में ग्रामीणों ने भ्रष्टाचार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया, वहीं दूसरी ओर साधासर के एक व्यक्ति ने ईमानदारी की अनूठी मिसाल पेश की। इसके अतिरिक्त, दुसारणा में किसानों को नैनो यूरिया के लाभों से अवगत कराया गया।

गोपालसर गांव इन दिनों अशांति के दौर से गुजर रहा है। गांव में निर्माणाधीन एक नए ट्यूबवेल को लेकर भ्रष्टाचार के आरोप लगने के बाद सोमवार को ग्रामीणों का धैर्य जवाब दे गया। उन्होंने ठेकेदार पर घटिया सामग्री का उपयोग करने का आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।

ग्रामीणों का कहना है कि ट्यूबवेल की खुदाई 900 फीट तक होनी चाहिए थी, लेकिन ठेकेदार ने केवल 785 फीट पर ही काम रोक दिया। बजरंगलाल बुडिया नामक ग्रामीण ने बताया कि मानकों के अनुसार 6 एमएम के 300 किलो वजनी केसिंग पाइप लगाए जाने थे, लेकिन मौके पर सिर्फ 3 एमएम के 145 किलो वजनी पाइप ही लाए गए। ग्रामीणों ने जब इसका विरोध किया तो ठेकेदार ने मशीन बंद कर दी और काम रोक दिया। इसके विरोध में ग्रामीण धरने पर बैठ गए हैं। धरने पर बैठे सुगनसिंह बुडिया, सीताराम बुडिया, रामेश्वरलाल, मघाराम, लालाराम, गिरधारीलाल, सोहनलाल, और भानीराम बुडिया सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने मांग की है कि ट्यूबवेल का निर्माण नियमों के अनुसार ही हो।

वहीं, साधासर गांव के रमेश तर्ड ने ईमानदारी का परिचय देते हुए एक सराहनीय कार्य किया है। उन्हें लावारिस हालत में सोने के फूलड़े मिले थे, जिन्हें उन्होंने उनके असली मालिक तक पहुंचाया। ये फूलड़े मसूरी गांव के कैलाश पुत्र भंवरलाल पोटलिया के थे। रमेश ने पूरी तस्दीक करने के बाद फूलड़ों को कैलाश को सौंप दिया। उनकी इस ईमानदारी की सर्वत्र सराहना हो रही है।

दुसारणा गांव में आज इफको द्वारा एक किसान प्रशिक्षण सभा का आयोजन किया गया। ग्राम सेवा सहकारी समिति के तत्वावधान में आयोजित इस प्रशिक्षण में किसानों को नैनो यूरिया के फायदे बताए गए। किसानों को अपनी आय बढ़ाने के लिए इसका उपयोग करने के लिए प्रेरित किया गया। समिति व्यवस्थापक संग्रामसिंह ने सभी का आभार व्यक्त किया।

मदनलाल की अध्यक्षता में आयोजित इस सभा में मुख्य अतिथि के रूप में रामस्वरूप उपस्थित रहे। इफको के क्षेत्रीय प्रबंधक एमआर जाखड़ और एमडीई राहुल ढाका ने नैनो यूरिया के माध्यम से खेती में लागत कम करने, खेत की मिट्टी, हवा और पानी को प्रदूषित होने से बचाने की बात कही। उन्होंने किसानों को नैनो यूरिया के उपयोग की विधियों के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी।

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