राजस्थान के शिक्षा जगत में एक बार फिर हलचल है। राजस्थान शिक्षा सेवा प्राध्यापक संघ (रेसला) के शिक्षक अपनी मांगों को लेकर लामबंद हो गए हैं। मंगलवार को, शिक्षकों ने सरकार तक अपनी बात पहुंचाने के लिए ज्ञापन सौंपा, जिसमें त्वरित विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की मांग प्रमुख थी।
संघ के सदस्य डॉ. मनीष कुमार सैनी ने बताया कि यह तो बस शुरुआत है। संगठन ने उपखंड स्तर पर अपनी आवाज बुलंद कर दी है, और अब बुधवार को जिला स्तर पर भी ज्ञापन सौंपे जाएंगे। लेकिन यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आंदोलन और तेज होगा।
डॉ. सैनी के अनुसार, 21 अगस्त को शिक्षा निदेशालय, बीकानेर पर धरना दिया जाएगा। इसके बाद भी यदि स्थिति जस की तस बनी रही, तो विधानसभा सत्र के दौरान विधानसभा पर रैली निकालकर धरना देने की योजना है।
भगतराज खत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री को संबोधित ज्ञापन में कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए गए हैं। संघ की प्रमुख मांगों में वरिष्ठ व्याख्याता पद को डाइंग कैडर घोषित करने, नव क्रमोन्नत विद्यालयों में व्याख्याताओं के पदों का सृजन करने, और उपप्राचार्य, प्राचार्य और व्याख्याता के पदों के लिए लंबित डीपीसी को शीघ्र पूरा करने की मांग शामिल है। इसके अतिरिक्त, एसबीसी शून्य मेरिट व्याख्याताओं के स्थायीकरण का मुद्दा भी उठाया गया है।
इस विरोध प्रदर्शन में संघ के कई सदस्य शामिल थे, जिनमें हरिराम कूकणा, सहीराम भाम्भू, किशोर सिंह राजपुरोहित, श्रवण कुमार मोटसरा, श्रवण कुमार सऊ, नरेंद्र कुमार कानोत, भव्य कटारिया, ओम प्रकाश सारण, मांगीलाल, देवीलाल बाना, लीलाराम मीणा, आशीष और अन्य व्याख्याता शामिल थे।
रेसला का यह आंदोलन शिक्षा जगत में एक महत्वपूर्ण मोड़ ले सकता है। अब देखना यह है कि सरकार इस पर क्या प्रतिक्रिया देती है और शिक्षकों की मांगों को किस हद तक पूरा करती है। इस घटनाक्रम पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं, क्योंकि इसका असर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था पर पड़ना तय है।