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राजस्थान गौरव भीखमचन्द पुगलिया की स्व. माता को सर्वसमाज ने अर्पित किये श्रद्धासुमन, आध्यात्मिक व्यक्तित्व को किया याद

डूंगरगढ़ one 18 जनवरी, 2026 श्रीडूंगरगढ़। सेवा केंद्र मालू भवन में रविवार को संथारा साधिका, श्रद्धा की प्रतिमूर्ति स्व. किरण देवी पुगलिया की स्मृति सभा सेवा केंद्र व्यवस्थापिका साध्वी संगीतश्री एवं डॉ. साध्वी परमप्रभा के सान्निध्य में आयोजित हुई। जिसमें साध्वीद्वय द्वारा संथारा साधिका स्व. किरणदेवी आध्यात्मिक व्यक्तित्त्व को याद करते हुए उसे प्रेरणादायी बताया।

स्मृति सभा में साध्वी वृंद में साध्वी कमलविभा, साध्वी ऋजुप्रज्ञा, साध्वी संपतप्रभा, साध्वी सुलेखाश्री सहित परिवार की ओर से पुत्र भीखमचंद पुगलिया, पुत्रवधु सुशीला पुगलिया, कुसुम बोरड़, संजय बरडिया एवं भीकमचंद पुगलिया (जयपुर) ने अपने भाव व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित की। पुत्र भीखमचन्द पुगलिया ने अपनी माता के व्यक्तित्व को स्वयं के जीवन निर्माण का आधार बताया।

आयोजित स्मृति सभा कार्यक्रम में सामाजिक संस्थाओं की ओर से सभा मंत्री प्रदीप पुगलिया, महिला मंडल प्रतिनिधि मंजू झाबक, युवक परिषद मंत्री पीयूष बोथरा एवं अणुव्रत समिति के उपाध्यक्ष सत्यनारायण स्वामी ने भी श्रद्धासुमन अर्पित किए। कार्यक्रम में विभिन्न संस्थाओं के पदाधिकारी, समाज के गणमान्य नागरिक एवं बड़ी संख्या में पारिवारिक जन उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन महिला मंडल मंत्री अंबिका डागा ने किया।

आचार्य महाश्रमण के दर्शन करके परिजनों ने प्राप्त किया था सम्बल

श्रद्धा की प्रतिमूर्ति संथारा साधिका स्व. किरणदेवी पुगलिया के पुत्र भीखमचन्द पुगलिया ने परिजनों के साथ आचार्य महाश्रमण के दर्शन करके आत्म सम्बल प्राप्त किया था। भीखमचन्द पुगलिया और सुशीला पुगलिया ने संथारा के दौरान की वस्तुस्थिति और संथारा साधिका के भावों की उच्चता को आचार्य के समक्ष प्रकट किया।

आचार्य महाश्रमण ने स्व. किरणदेवी को आध्यात्मिकता से जीवन जीने वाली महिला बताया और कहा कि श्राविका ने अपने अंतिम मनोरथ संलेखना का वरण करके आध्यात्मिक कलश परिवार पर चढ़ाया है। आचार्य ने अपने प्रेरणास्वर में कहा कि परिजन उनके सद्गुणों को आत्मसात करते हुए जीवन में आगे बढ़े।

परिजनों ने साध्वी प्रमुखा विश्रुतविभा और सभी चरित्र आत्माओं के दर्शन किये।

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