गाँव में जैसे ही रथ यात्रा ने प्रवेश किया, डोल और नगाड़ों की मधुर ध्वनि से पूरा वातावरण गूंज उठा। पुष्प वर्षा से रथ को सराबोर कर दिया गया। गाँव की बेटियों ने अपने कलात्मक हाथों से रंगोली बनाकर प्रवेश द्वार को और भी आकर्षक बना दिया था। यह दृश्य गाँव की एकता और संस्कृति के प्रति प्रेम का प्रतीक था।
श्री गणेश मंदिर में चार कुण्डीय यज्ञ का आयोजन किया गया, जिसमें गाँव के हर वर्ग के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। यज्ञ में मंत्रोच्चार और आहुतियों से वातावरण शुद्ध और भक्तिमय हो गया। यज्ञ के बाद विशाल महाप्रसाद का वितरण किया गया, जिसमें सभी ग्रामवासियों ने एक साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण किया।
इस अवसर पर गायत्री परिवार बीकानेर की टोली के साथ श्रीडूंगरगढ़ के सदस्यों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को और भी गरिमामय बना दिया। यात्रा ने गाँव में एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया, और लोगों को एक साथ मिलकर समाज के कल्याण के लिए काम करने की प्रेरणा दी। यह आयोजन न केवल धार्मिक था, बल्कि सामुदायिक सद्भाव और एकता का भी प्रतीक बन गया।