डूंगरगढ़ one 18 जनवरी, 2026 श्रीडूंगरगढ़। सेवा जब सरहदें पार करती है, तो उसका असर भी दूर तक दिखाई देता है। ऐसा ही नजारा श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र के मोमासर गांव में देखने को मिला, जहां सुरवि चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से आयोजित निःशुल्क डेंटल कैंप में सात समंदर पार से आए विशेषज्ञों ने ग्रामीणों के चेहरों पर मुस्कान लौटा दी।
बेल्जियम की टीम बनी आकर्षण
कैंप का मुख्य आकर्षण बेल्जियम से आए डेंटल विशेषज्ञ डॉ. मर्लिन, अनायास और लीसा रहे। इन विदेशी डॉक्टरों ने अत्याधुनिक मशीनों की मदद से ग्रामीणों और बच्चों के दांतों से जुड़ी जटिल समस्याओं की जांच और उपचार किया। कैंप के समापन पर ट्रस्ट की ओर से डॉक्टरों का शॉल ओढ़ाकर व स्मृति चिन्ह भेंट कर राजस्थानी परंपरा के अनुसार सम्मान किया गया।
1223 लोगों को मिला लाभ
कैंप की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें कुल 1223 से अधिक ग्रामीणों और बच्चों ने लाभ लिया।
- 723 स्कूली बच्चे: आदर्श विद्या मंदिर व इचरच देवी पटावरी स्कूल के विद्यार्थियों की स्क्रीनिंग व उपचार किया गया।
- 500 से अधिक ग्रामीण: मोमासर व आसपास की ढाणियों से आए लोगों का इलाज हुआ।
जांच के साथ उपचार भी
कैंप में केवल दांतों की जांच ही नहीं, बल्कि दांतों का निष्कासन, फिलिंग (मसाला भरना) और ओरल हाइजीन की ट्रेनिंग भी दी गई। उपचार के बाद मरीजों को निःशुल्क दवाइयां वितरित की गईं। स्थानीय डॉक्टर डॉ. ओमप्रकाश, डॉ. अरविंद, डॉ. विजय और मोहम्मद जफर ने बेल्जियम की टीम के साथ कंधे से कंधा मिलाकर सेवाएं दीं।
सहयोगियों का किया सम्मान
कैंप को सफल बनाने में किशनलाल पटावरी, विपिन जोशी, जुगराज संचेती, बजरंग लाल सोनी, जगत पटावरी और राजेश रोहिल्ला का विशेष योगदान रहा। इनके द्वारा डॉक्टरों और स्वयंसेवकों को ट्रस्ट का प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। वहीं व्यवस्थाओं में सहयोग करने वाले संजय सुथार, सांवरमल शर्मा, निशि उपाध्याय, बाबूलाल गर्ग और युवा स्वयंसेवकों को सर्टिफिकेट प्रदान किए गए।
मानवता और मित्रता की मिसाल
यह डेंटल कैंप केवल उपचार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मानवता, सेवा और अंतरराष्ट्रीय मित्रता का प्रतीक बनकर उभरा। विदाई के समय मोमासर के ग्रामीणों ने विदेशी डॉक्टरों को नम आंखों और ढेरों दुआओं के साथ विदा किया।