श्रीडूंगरगढ़, 31 अक्टूबर 2025। बीकानेर स्थित धूनी नाथ गिरी मठ में शुक्रवार का दिन एक विशेष उत्सव का साक्षी बना। अवसर था महामंडलेश्वर स्वामी विशोकानंद जी महाराज के संन्यास दीक्षा के 50 वर्ष पूरे होने का। इस पावन अवसर पर श्रद्धालुओं ने स्वर्ण जयंती महोत्सव का आयोजन किया, जिसमें दूर-दूर से आए भक्तजन शामिल हुए।
समारोह में स्वामी विशोकानंद जी महाराज ने अपने प्रवचन में धर्म के वास्तविक अर्थ को समझाया। उन्होंने कहा कि धर्म मात्र पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारे जीवन को अनुशासित करने का मार्ग है। संन्यास केवल वस्त्रों का त्याग नहीं है, बल्कि विचारों को तपाने की एक साधना है। उन्होंने उपस्थित सभी लोगों को धर्म और नीति के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया।
दशनाम गोस्वामी सभा समिति के युवा प्रदेश अध्यक्ष विनोद गिरी गोस्वामी समारोह के मुख्य अतिथि थे। उन्होंने स्वामीजी को 51 किलो की फूलमाला और साफा पहनाकर उनका अभिनंदन किया। विनोदगिरी ने स्वामीजी को धर्म, तप और त्याग की साक्षात प्रतिमूर्ति बताया। उन्होंने कहा कि स्वामीजी का जीवन गुरु भक्ति और शिव भक्ति से ओत-प्रोत है। वे भारतीय परंपरा और शिक्षा के ध्वजवाहक हैं।
यह भी उल्लेखनीय है कि स्वामीजी देश भर में सात से अधिक गुरुकुल आधारित विद्यालयों का संचालन कर रहे हैं। गुजरात, पंजाब, हरिद्वार और बीकानेर में स्थित उनके आश्रमों में हजारों छात्र धर्म, संस्कार और संस्कृति का ज्ञान प्राप्त कर रहे हैं। स्वामीजी बीकानेर राजपरिवार के राजगुरू भी हैं।
इस अवसर पर विनोदगिरी ने स्वामी विमर्शानंद जी महाराज का भी सम्मान किया। समारोह में भाजपा नेता दिलीप पुरी, प्रदेश सचिव प्रेम बन, एडवोकेट नरेंद्र पुरी सहित दशनाम गोस्वामी समाज के अनेक श्रद्धालु और गणमान्य लोग उपस्थित थे। इस महोत्सव ने एक बार फिर धर्म, त्याग और सेवा के महत्व को रेखांकित किया।