स्वयंसेवकों ने पूरे उत्साह के साथ महाविद्यालय परिसर और कक्षाओं में श्रमदान किया। पंखों से धूल झाड़ी गई, खिड़कियों और दरवाजों को साफ किया गया, और दीवारों से लेकर छतों तक, हर कोने को स्वच्छ बनाने का प्रयास किया गया। यह दृश्य स्वच्छता के प्रति समर्पण और सामूहिक भावना का प्रतीक था।
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. नवदीप सिंह बैंस ने स्वयंसेवकों के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि स्वच्छता एक व्यक्तिगत जिम्मेदारी है, जो केवल महाविद्यालय तक सीमित नहीं होनी चाहिए। उन्होंने सभी से अपने घरों, गलियों और मोहल्लों में भी स्वच्छ वातावरण बनाए रखने का आह्वान किया।
कार्यक्रम अधिकारी डॉ. विनोद कुमारी ने छात्राओं को स्वच्छता के महत्व से अवगत कराया और उन्हें स्वच्छता की शपथ दिलाई। वहीं, डॉ. हिमांशु कांडपाल ने सिंगल यूज प्लास्टिक के खतरों और कचरे के उचित निस्तारण के तरीकों पर प्रकाश डाला।
शिविर का दूसरा सत्र ई-वेस्ट मैनेजमेंट पर केंद्रित था। राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल की टीम, जिसमें गिरीश व्यास (असिस्टेंट एनवायरमेंटल इंजीनियर), ज्योति (जूनियर एनवायरमेंटल इंजीनियर), वीणा सिंघल (साइंटिफिक ऑफिसर) और प्रीति शेखावत (जूनियर एनवायरमेंटल इंजीनियर) शामिल थे, ने वीडियो प्रस्तुति के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय ई-कचरा दिवस के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2018 से हर साल 14 अक्टूबर को यह दिवस मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य ई-कचरे के खतरों के प्रति जागरूकता बढ़ाना और इसके पुनर्चक्रण को प्रोत्साहित करना है।
इस सत्र में ई-वेस्ट मैनेजमेंट प्रतियोगिता भी आयोजित की गई, जिसमें रिया व्यास और सरस्वती कुमावत ने प्रथम, खुशी शर्मा और दीपिका भाटी ने द्वितीय तथा एकता अग्रवाल, संध्या स्वामी, रवीना रामावत और दीपशिखा सोनी ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। मंडल की टीम ने विजेताओं को पुरस्कृत किया।
शिविर के समापन पर स्वयंसेविकाओं को नाश्ता वितरित किया गया। इस कार्यक्रम में दोनों इकाइयों के कार्यक्रम अधिकारी, स्वयंसेवक, कर्मचारी तनुजा और परमेश्वरी सिद्ध उपस्थित रहे।
यह शिविर न केवल स्वच्छता के प्रति जागरूकता फैलाने में सफल रहा, बल्कि इसने ई-कचरा प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर भी ध्यान आकर्षित किया। यह एक सकारात्मक कदम है जो भविष्य में स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण बनाने में सहायक होगा।