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स्व. जेठी देवी-रेखाराम की स्मृति में बालिका छात्रावास में बनेगा कमरा, 28 अगस्त को होगा प्रवेश कार्यक्रम

बैठक की शुरुआत में, मंत्री सुशील सेरडिया ने भवन निर्माण कार्य की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिससे उपस्थित सदस्यों को विकास कार्यों की गति और दिशा का स्पष्ट अंदाजा हुआ। इसके बाद, बैठक के एजेंडे पर गहन चर्चा हुई, जिसमें कई महत्वपूर्ण घोषणाएँ की गईं, जो शिक्षा के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करने वाली साबित होंगी।

स्व. जेठी देवी, पत्नी स्व. रेखाराम जाखड़ (जेतासर), जो स्व. रतनाराम जाखड़ की सुपुत्री थीं, की स्मृति में, उनके पुत्रों – हुक्माराम, मांगीलाल, मूलचन्द और रामप्रताप जाखड़ ने एक अनुकरणीय कदम उठाया। उन्होंने 2.81 लाख रुपये की लागत से छात्रावास में एक कमरा निर्माण कराने की घोषणा की और उदारता का परिचय देते हुए, हुक्माराम जाखड़ ने पूरी राशि प्रबंधन को सौंप दी। इस अवसर पर रामुराम सारण (जालबसर), विकास गोदारा (श्रीडूंगरगढ़) और भैराराम लुखा (जालबसर) ने भी आर्थिक सहयोग देने का संकल्प लिया, जिससे समाज के हर वर्ग की भागीदारी सुनिश्चित हुई।

जाट विकास परिषद के अध्यक्ष कानाराम तरड़ ने एक अत्यंत सराहनीय घोषणा कर सभी का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने आर्थिक रूप से कमजोर एक बालिका का सम्पूर्ण शैक्षिक खर्च उठाने का बीड़ा उठाया, जो न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि समाज में शिक्षा के महत्व को भी दर्शाता है।

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि आगामी 28 अगस्त को संत कर्मा बाई बालिका छात्रावास में प्रवेश कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए अलग-अलग कमेटियों का गठन किया गया, जिन्हें व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी सौंपी गई। सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक डालूराम कस्वां ने इस कार्यक्रम में सहयोग करने की घोषणा की, जो अनुभव और उत्साह का सुंदर संगम था। पूर्व सरपंच मेघराज चोटिया (धीरदेसर) ने भी 2.81 लाख रुपये की लागत से एक और कमरा निर्माण कराने का संकल्प लिया, जबकि खींयाराम भूकर (बींझासर) ने 1.01 लाख रुपये की सहयोग राशि प्रबंधन को सौंपी।

बैठक में पूर्व उप विधि परामर्शक हजारीराम ज्याणी (लिखमादेसर) के निधन पर दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई, जिससे सभी ने उन्हें भावभीनी विदाई दी।

अध्यक्षता कर रहे एडवोकेट श्यामसुन्दर आर्य ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि दानदाताओं का यह योगदान शिक्षा के क्षेत्र में समाज के गौरवशाली इतिहास की रचना कर रहा है। उनका मानना था कि भविष्य में यह छात्रावास एक मजबूत शिक्षा व्यवस्था का आधार बनेगा। उन्होंने समाज के प्रत्येक व्यक्ति से संस्था से जुड़ने का आह्वान किया, ताकि सामूहिक प्रयासों से शिक्षा के स्तर को और ऊपर उठाया जा सके।

बैठक में तुलछीराम गोदारा, लक्ष्मणराम खिलेरी, आदुराम जाखड़, चांदराम चाहर, कानाराम तरड़ समेत बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे, जो शिक्षा के प्रति समाज की जागरूकता और सक्रियता का प्रतीक थे। अंत में छात्रावास अधीक्षक श्रवण कुमार भाम्भू ने सभी का आभार व्यक्त किया, जिससे बैठक का सुखद समापन हुआ।

यह बैठक न केवल दान और संकल्प का संगम थी, बल्कि शिक्षा के प्रति समाज की अटूट निष्ठा और भावी पीढ़ी के उज्जवल भविष्य के प्रति समर्पण का भी प्रतीक थी।

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