श्रीडूंगरगढ़, 19 अगस्त 2025: राजस्थान के श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र का माणकरासर गांव इन दिनों दोहरी मार झेल रहा है। एक तरफ जहां गांव के सरकारी स्कूल में शिक्षकों की कमी से शिक्षा व्यवस्था चरमरा गई है, वहीं दूसरी तरफ खेतों में बिजली की अनियमित आपूर्ति ने किसानों की कमर तोड़ दी है। इस विकट परिस्थिति से त्रस्त ग्रामीणों का एक प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को बीकानेर पहुंचा और विभागीय अधिकारियों के समक्ष अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए ज्ञापन सौंपा।
ग्रामीणों ने जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में दस्तक देते हुए बताया कि 2023 में क्रमोन्नत हुए राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में दो वर्षों से शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की गई है। इस वजह से विद्यालय का 10वीं और 12वीं का परिणाम निराशाजनक रहा है। ग्रामीणों ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इसका सबसे बुरा प्रभाव गांव की बालिकाओं की शिक्षा पर पड़ रहा है, जो स्कूल छोड़ने के लिए विवश हो रही हैं। वर्तमान में विद्यालय केवल छह शिक्षकों के भरोसे चल रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि वे पिछले दो वर्षों में लगभग एक दर्जन ज्ञापन दे चुके हैं, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की गई तो वे स्कूल में तालाबंदी करने के लिए बाध्य होंगे। विभागीय अधिकारियों ने ग्रामीणों को जल्द ही सकारात्मक कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है।
शिक्षा विभाग से निराशा हाथ लगने के बाद ग्रामीणों ने बिजली विभाग का रुख किया। वे संभागीय मुख्य अभियंता कार्यालय पहुंचे और अपनी व्यथा सुनाई। ग्रामीणों ने बताया कि माणकरासर गांव में बिजली आपूर्ति समंदसर में बने जीएसएस से होती है। आरोप है कि विभाग के कर्मचारी मनमाने ढंग से माणकरासर की लाइन काट देते हैं, जिससे ग्रामीण बुरी तरह से परेशान हैं। खेतों में खड़ी फसलें बिजली के अभाव में सूख रही हैं। ग्रामीणों ने विभाग के अधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि एक तो बारिश नहीं हो रही है, ऊपर से मूंगफली की फसल को पर्याप्त बिजली नहीं मिल रही है, जिससे उन्हें भारी नुकसान हो रहा है। उन्होंने तत्काल निर्बाध बिजली आपूर्ति की मांग की है।
प्रतिनिधिमंडल में शामिल रेवंतराम कुलड़िया, मघाराम मेघवाल, मोहन भूकर, राकेश पड़िहार, ईश्वरराम भूकर, तोलाराम सियाग और मोहन कुलड़िया ने अधिकारियों से मिलकर गांव की समस्याओं का समाधान करने की गुहार लगाई। अब देखना यह है कि ग्रामीणों की इस गुहार पर प्रशासन कब तक ध्यान देता है और उन्हें शिक्षा और बिजली संकट से मुक्ति दिलाता है।