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सामने आई शिकायतें तो हुई श्रीडूंगरगढ़ में कार्रवाई, गहरे और लंबे जुड़े है तार

श्रीडूंगरगढ़, 7 नवंबर 2025: दीपावली के पावन अवसर पर, जब घरों में पकवानों की खुशबू फैल रही थी, श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र में सरस घी में मिलावट की आशंका ने लोगों को चिंता में डाल दिया। यह मामला केवल श्रीडूंगरगढ़ तक ही सीमित नहीं था, बल्कि बीकानेर शहर और आसपास के गांवों, यहाँ तक कि कालूबास और आड़सर बास की गलियों तक में नकली घी मिलने की खबरें आ रही थीं।

पिछले दो वर्षों में नकली घी के कारोबार ने गहरी जड़ें जमा ली थीं। सूत्रों के अनुसार, ऊपनी गांव में 5500 रुपये प्रति पीपा की दर से सरस घी की आपूर्ति की गई, जिसकी शिकायत उरमूल डेयरी के अधिकारियों तक पहुंची। इसके बाद डेयरी प्रशासन हरकत में आया और गुरुवार को उरमूल डेयरी और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने कार्रवाई शुरू की।

इस कार्रवाई के तहत, श्रीडूंगरगढ़ के अमीर पट्टी स्थित एक दुकान पर स्टिंग ऑपरेशन किया गया। प्रशासन ने एक बोगस ग्राहक भेजकर घी खरीदा। जांच में पाया गया कि घी के टिन पर लिखे बैच नंबर, निर्माण तिथि और अंतिम उपयोग की तिथि पैकिंग के गत्ते से मेल नहीं खा रही थी। इतना ही नहीं, टिनों पर अलग-अलग जिलों की सरस डेयरी की मार्किंग भी पाई गई, जिससे मिलावट का संदेह और गहरा गया।

ब्रदीलाल श्यामसुंदर राठी फर्म के मालिक से पूछताछ की गई, जिससे संदेह और बढ़ गया। फिलहाल, घी के नमूने प्रयोगशाला में जांच के लिए भेज दिए गए हैं।

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या नकली घी के फलते-फूलते कारोबार से अधिकारी और डेयरी प्रबंधन अनजान थे? सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, सरस डेयरी के अपने प्लांट में ही पिछले दो महीने से घी की कमी थी। ऐसे में, कालूबास की गलियों में सरस के नकली घी पहुंचने की खबरें डेयरी संचालकों तक पहुंच रही थीं। यह कारोबार श्रीडूंगरगढ़ ही नहीं, बीकानेर में भी खूब फल-फूल रहा था।

अब यह जांचना जरूरी है कि घी कहां बन रहा है और बाजार में इतनी मात्रा में कहां से आ रहा है। फिलहाल, एक मामला सामने आया है, लेकिन इसे अंजाम तक पहुंचाना अभी भी एक चुनौती है।

सरस डेयरी द्वारा घी की दर 9750 रुपये प्रति टिन तय की गई है, लेकिन बाजार में यह 5000 से 6000 रुपये प्रति टिन में मिल रहा है। जानकारों का कहना है कि यह गाय के दूध से बना घी होना संभव नहीं है। निश्चित रूप से इसमें मिलावट की गई है या यह नकली है।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजीव सोनी ने बताया कि नकली घी श्वसन तंत्र से लेकर त्वचा रोगों तक को बढ़ावा दे सकता है। यह बेहद खतरनाक है। ऐसे में, आमजन को अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने की आवश्यकता है।

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