24 अगस्त, 2025 की रात श्रीडूंगरगढ़ से एक ऐसी खबर आई जिसने इंसानियत को एक बार फिर जगा दिया। रात गहराती जा रही थी, घड़ी की सुईयाँ 11:30 की ओर इशारा कर रही थीं, तभी आबूरोड और सिरोही के बीच के हाईवे पर एक दर्दनाक हादसा हुआ। एक ट्रक, जो रफ्तार से आगे बढ़ रहा था, अचानक आगे चल रहे एक अन्य ट्रक से जा टकराया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि ट्रक का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और चालक कैबिन में फंस गया।
उसी वक़्त, श्रीडूंगरगढ़ थाने की एक टीम, जिसमें हेड कांस्टेबल देवाराम, कांस्टेबल रविन्द्र सिंह और ड्राइवर नरेश कुमार शामिल थे, राजकार्य से गुजरात से लौट रही थी। उनकी नज़र इस दुर्घटना पर पड़ी। बिना एक पल गवाएं, उन्होंने अपनी गाड़ी रोकी और उस ट्रक ड्राइवर की मदद के लिए दौड़ पड़े जो मौत और जिंदगी के बीच फंसा हुआ था।
हेड कांस्टेबल देवाराम ने बताया कि दुर्घटना उनके सामने ही हुई थी। उन्होंने तुरंत एक निजी गाड़ी रुकवाई और ड्राइवर को निकालने में जुट गए। ट्रक का फाटक बुरी तरह से मुड़ गया था, जिसके कारण वह खुल नहीं रहा था। ऐसे में कांस्टेबल रविन्द्रसिंह और नरेश कुमार ने मिलकर फाटक को तोड़ने में मदद की। आखिरकार, उन्होंने ड्राइवर को कैबिन से बाहर निकाला और उसे तुरंत अस्पताल भिजवाया।
देवाराम ने बताया कि घायल को अस्पताल भेजने के बाद उनकी टीम भी अपनी गाड़ी से रवाना हो गई। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि पुलिस सिर्फ कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए ही नहीं होती, बल्कि वह हर मुश्किल घड़ी में लोगों की मदद के लिए भी तत्पर रहती है। यह कहानी मानवीय संवेदना, कर्तव्यनिष्ठा और तत्परता का एक जीवंत उदाहरण है।