श्रीडूंगरगढ़, [दिनांक]. आस्था और श्रद्धा के रंग में डूबा श्रीडूंगरगढ़ इन दिनों भक्तिमय वातावरण में सराबोर है। एक ओर जहाँ दधिमती माताजी मंदिर में नवरात्र पर्व की धूम है, वहीं दूसरी ओर असू चंड के पर्व ने भी शहर में उत्साह का संचार किया है।
कालू बास स्थित दधिमती माताजी मंदिर में नवरात्र का पर्व पूरे विधि-विधान और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। मंदिर में प्रतिदिन माता का 51 किलो दूध से अभिषेक किया जा रहा है, जो भक्तों के अटूट विश्वास का प्रतीक है। मंदिर परिसर में 301 अखंड मनोकामना दीपक ज्योत प्रज्वलित की गई हैं, जो वातावरण को और भी अधिक आध्यात्मिक बना रही हैं।
इस अवसर पर मंदिर में प्रतिदिन कन्या भंडारे का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें बुधवार को 501 कन्याओं ने भोजन ग्रहण किया। मंदिर समिति और श्रद्धालु इस आयोजन की व्यवस्था में तन-मन-धन से जुटे हुए हैं, जो सेवाभाव का अनुपम उदाहरण है।
उधर, नागौर के गांव डेह में माता कुंजलदे के दर्शन के लिए भी श्रीडूंगरगढ़ से एक पदयात्री संघ रवाना हुआ। पारीक समाज की कुलदेवी माता के दर्शनार्थ अनेक युवा श्रद्धालु पूरे उत्साह और उमंग के साथ पदयात्रा पर निकले हैं। समाज बंधुओं ने पदयात्रियों को शुभकामनाएं दीं। जानकारी के अनुसार, ये यात्री नवमी को माता के दर्शन कर धोक लगाएंगे।
इसके अतिरिक्त, झूलेलाल जी मंदिर में असू चंड का पर्व भी धूमधाम से मनाया गया। सोमवार को झंडारोहण के साथ शुरू हुआ यह पर्व दिनभर विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों के साथ संपन्न हुआ। समाज अध्यक्ष श्रवण कुमार गुरनाणी ने बताया कि हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी समाज के सभी परिवार 71वां असू चंड महोत्सव मनाने के लिए एकत्र हुए। भंडारे के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ, जिसमें रवि रिझवानी ने बताया कि भजन, कीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए।
इन आयोजनों में उमड़ी भीड़ और भक्तों का उत्साह इस बात का प्रमाण है कि श्रीडूंगरगढ़ में आस्था और श्रद्धा का अटूट बंधन आज भी कायम है। ये पर्व न केवल धार्मिक महत्व रखते हैं, बल्कि सामाजिक समरसता और भाईचारे को भी बढ़ावा देते हैं।