राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के मार्गदर्शन में, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव एवं अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश मांडवी राजवी के नेतृत्व में जिले भर में कई कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य बच्चों को उनके अधिकारों के बारे में जागरूक करना और उन्हें बेहतर भविष्य के लिए प्रोत्साहित करना था।
श्रीडूंगरगढ़ के मूक-बधिर विद्यालय में एक विशेष क्रिकेट प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। न्यायाधीश मांडवी राजवी ने स्वयं पहली गेंद खेलकर मैच का शुभारंभ किया, जिससे बच्चों का उत्साह दोगुना हो गया। बच्चों ने खेल में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और खेल भावना का प्रदर्शन किया।
वहीं, बालिका गृह में बालिकाओं के लिए पोस्टर पेंटिंग, कविता और खेल-कूद प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। इन प्रतियोगिताओं में बालिकाओं ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। विजेता बालिकाओं को पुरस्कृत किया गया, जिससे उनके हौसले और बुलंद हुए।
एक जागरूकता शिविर में न्यायाधीश राजवी ने बालिकाओं को बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, कन्या भ्रूण हत्या, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान और पीड़ित प्रतिकर योजना जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बालिकाओं को शिक्षा के महत्व को समझाया और उन्हें अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही वह शक्ति है जिससे बालिकाएं अपने जीवन में सफलता प्राप्त कर सकती हैं और समाज में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं।
श्रीडूंगरगढ़ सहित सभी तालुकाओं में एलएडीसीएस टीम और पीएलवी द्वारा शिविर लगाए गए, जिनमें बाल अधिकारों और सुरक्षा से जुड़े विषयों पर जानकारी दी गई। इन शिविरों का उद्देश्य बच्चों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना और उन्हें शोषण से बचाना था।
इन कार्यक्रमों में सहायक निदेशक अरुण सिंह शेखावत, परिवीक्षा अधिकारी सुरेंद्र कुमार, छात्रावास अधीक्षक नीलम पंवार, वरिष्ठ शारीरिक शिक्षक संजय मारू सहित अन्य अधिकारियों ने भी भाग लिया। सभी ने बच्चों को प्रोत्साहित किया और उन्हें बेहतर भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।
इन कार्यक्रमों से बाल दिवस पर बच्चों को न केवल मनोरंजन मिला, बल्कि उन्हें अपने अधिकारों और कर्तव्यों के बारे में भी महत्वपूर्ण जानकारी मिली। इन पहलों से निश्चित रूप से बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आएगा और वे एक उज्ज्वल भविष्य की ओर अग्रसर होंगे।