इस परियोजना का उद्देश्य यात्रियों को ट्रेन में चढ़ने, उतरने और प्रतीक्षा करते समय अधिक सुविधा प्रदान करना है। श्रीडूंगरगढ़ के यात्रियों ने लंबे समय से इन सुविधाओं के विस्तार की मांग की थी, जिसमें प्लेटफॉर्म की ऊंचाई बढ़ाने की मांग प्रमुख थी। अब यह कार्य स्टेशन पर शुरू हो गया है और प्रगति पर है।
वर्तमान में, दिव्यांग, बुजुर्ग, नि:शक्तजन, महिलाओं और बच्चों को ट्रेन में चढ़ने-उतरने में काफी कठिनाई का सामना करना पड़ता है। इस समस्या के समाधान के लिए प्लेटफॉर्म की ऊंचाई बढ़ाई जा रही है, जिससे यात्रियों को थोड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
रेल संघर्ष समिति के अध्यक्ष तोलाराम मारू और समिति के मंत्री, भाजपा नेता विनोदगिरी गुसाई ने बताया कि श्रीडूंगरगढ़ में यात्रियों के हितों की लगातार अनदेखी की गई है। उन्होंने कहा कि स्टेशन से होने वाली आय को देखते हुए यहां जो सुविधाएं मिलनी चाहिए, वे नहीं मिल पा रही हैं। समिति इसके लिए लगातार प्रयासरत है।
तोलाराम मारू ने यह भी बताया कि उन्होंने रेल अधिकारियों से मुलाकात कर प्लेटफॉर्म पर डिस्पले लगाने और फर्स्ट क्लास विश्राम गृह बनाने की मांग की है, जो कि आवश्यक है। इसके साथ ही एक दस सूत्रीय मांगपत्र डीआरएम को सौंपा गया है।
वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक, बीकानेर ने बताया कि मंडल के विभिन्न स्टेशनों पर यात्री सुविधा हेतु लंबी दूरी की गाड़ियों में डिब्बों की निरंतर बढ़ोतरी को देखते हुए प्लेटफॉर्म की लंबाई बढ़ाई जा रही है, ताकि यात्रियों को ट्रेन में चढ़ने और उतरने में आसानी हो। छोटे-बड़े सभी स्टेशनों पर रेल लेवल और मीडियम लेवल प्लेटफॉर्म की ऊंचाई बढ़ाकर उसे हाई लेवल किया जा रहा है। साथ ही स्टेशनों के प्लेटफॉर्मों पर नए शेल्टर लगाने या शेल्टर के विस्तार का कार्य भी किया जा रहा है।
यह कार्य बीकानेर मंडल के NSG 4 स्टेशनों रतनगढ़, सादुलपुर और सिरसा सहित 31 स्टेशनों पर किया जा रहा है। इन स्टेशनों में गोगामेडी, मंडी डबवाली, महेंद्रगढ़, चरखी दादरी, हनुमानगढ़ टाउन, कोसली, भट्टू, अनूपगढ़, हांसी, कालांवाली, रायसिंहनगर, ऐलनाबाद, गजसिंहपुर, जैतसर, महाजन, नापासर, राजलदेसर, सतनाली, तहसील भादरा, केसरी सिंहपुर, लूणकरणसर, महाजन, नोहर, रामां, सादुलशहर, संगरिया, सतनाली मंडी, श्रीडूंगरगढ़ और श्रीकरनपुर शामिल हैं।
इस परियोजना से यात्रियों को निश्चित रूप से लाभ होगा और उनकी यात्रा अधिक आरामदायक बनेगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि यह परियोजना कब तक पूरी होती है और यात्रियों के जीवन में कितना बदलाव लाती है।