इन सात दिनों में, शिविरार्थियों ने एक साथ रहने और क्षत्रियोचित जीवन जीने के सिद्धांतों को व्यवहारिक रूप से समझा। संघ के केंद्रीय कार्यकारी गजेन्द्र सिंह आऊ ने समापन समारोह में कहा कि यह सामूहिक अभ्यास क्षत्रिय जीवन मूल्यों को आत्मसात करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने संघ के उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए कहा कि यह सद्गुणों के विकास और दुर्गुणों के विनाश के लिए समर्पित है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि श्री क्षत्रिय युवक संघ लगभग आठ दशकों से समाज में संस्कारों के निर्माण में अनवरत रूप से लगा हुआ है।
श्री गजेन्द्र सिंह ने अपने उद्बोधन में ऐतिहासिक महापुरुषों के जीवन को प्रेरणा का स्रोत बताया। उन्होंने त्याग की उस महान परंपरा का स्मरण किया जो हमें अपने पूर्वजों से विरासत में मिली है। उन्होंने शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक शक्ति को सुदृढ़ करने पर जोर देते हुए व्यक्तिगत हितों को समाज के व्यापक हित में परिवर्तित करने का आह्वान किया। उनका कहना था कि संघ की शिक्षाएँ मात्र शब्दों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि हमारे आचरण में भी दिखाई देनी चाहिए। इसके लिए शाखाओं और शिविरों से निरंतर जुड़े रहना आवश्यक है।
शिविर के दौरान, 17 अक्टूबर को संघ के द्वितीय संघप्रमुख श्रद्धेय आयुवान सिंह हुडील की जयंती मनाई गई। इस अवसर पर गजेन्द्र सिंह आऊ ने उनके जीवन परिचय और समाज के प्रति उनके अमूल्य योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आयुवान सिंह जी सदैव युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बने रहेंगे।
शिविर में भाग लेने वाले स्वयंसेवकों में झंझेऊ, पुन्दलसर, लखासर, धर्मास, मिंगसरिया, नोखागांव, श्रीडूंगरगढ़, बीकानेर शहर, पेथड़ासर, कोलासर, धूपालिया के साथ-साथ हिसार (हरियाणा), चूरू, जयपुर, सीकर, जैसलमेर और नागौर जैसे दूरस्थ स्थानों के युवा भी शामिल थे।
बीकानेर संभाग प्रमुख रेवंत सिंह जाखासर अपने सहयोगियों के साथ शिविर में उपस्थित रहे। आयोजन की व्यवस्था झंझेऊ ग्रामवासियों के सहयोग से सफलतापूर्वक संपन्न हुई, जो सामुदायिक भावना और एकजुटता का प्रतीक है। यह शिविर निश्चित रूप से युवाओं को सामाजिक और नैतिक मूल्यों के प्रति जागरूक करने में सहायक सिद्ध होगा।