डूंगरगढ़ one 12 दिसम्बर, 2025 श्रीडूंगरगढ़। श्रीडूंगरगढ़ में देसी घी के नाम पर चल रहा मिलावट का बड़ा खेल एक बार फिर बेनकाब हो गया है। भरोसे के नाम पर दुकानदारों ने लोगों के स्वास्थ्य से खुला खिलवाड़ किया और पाम ऑयल व अन्य केमिकल्स को “शुद्ध देसी घी” बताकर बेचते हुए मोटा मुनाफा कमाया।
उरमूल डेयरी द्वारा खरीदे गए सरस ब्रांड के घी के सैंपल हेल्थ डिपार्टमेंट की लैब में फेल पाए गए हैं। रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से बताया गया कि घी में पाम ऑयल और अन्य मिलावट मौजूद है।
बोगस ग्राहक बनकर खरीदा था घी
उरमूल डेयरी टीम ने श्रीडूंगरगढ़ के विभिन्न इलाकों से घी के कई बैच खरीदे थे। बद्रीलाल श्यामसुंदर नामक फर्म से बोगस ग्राहक के नाम पर लिया गया। सैंपल संदेह के आधार पर खाद्य सुरक्षा विभाग की लैब में भेजा गया। लैब रिपोर्ट ने मिलावट की पुष्टि कर दी।
अब फर्म संचालक पर खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत कार्रवाई होगी, जिसमें दोष सिद्ध होने पर 6 महीने से 3 साल तक की सजा और जुर्माना शामिल है।
बाज़ार में घी के नाम पर तेल का कारोबार
शुद्ध देसी घी की पहचान उसके दानों, ब्यूटिरिक एसिड और प्राकृतिक खुशबू से होती है। लेकिन बाजार में बिक रहा नकली घी पाम ऑयल की चिकनाई, कृत्रिम खुशबू और एक जैसी बनावट लिए हुए था। 380 रुपए किलो के पैक पर ‘100% प्योर’ का दावा किया गया, जबकि अंदर वनस्पति तेल और एसेंस का मिश्रण निकला।
दुकानदार इसे बच्चों, प्रसूता महिलाओं और पूजा के लिए “सबसे श्रेष्ठ घी” बताकर बेच रहे थे। लेकिन जब इसे गर्म किया गया तो खुशबू कृत्रिम, रंग असामान्य और बनावट तेलीय मिली।
स्वास्थ्य के लिए धीमा जहर
डॉक्टरों का कहना है कि ऐसा नकली घी एलडीएल कोलेस्ट्रॉल बढ़ाता है, जिससे
- हार्ट डिजीज
- हाई ब्लड प्रेशर
- फैटी लिवर
- डायबिटीज
का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।
अभी और खुलासे बाकी
सूत्रों के अनुसार आधा दर्जन से ज्यादा सैंपल की रिपोर्ट आना अभी बाकी है। अनुमान है कि अधिकांश सैंपल फेल होंगे, जिससे मिलावट के इस नेटवर्क की और भी परतें खुल सकती हैं।
श्रीडूंगरगढ़ में मिलावट का बड़ा रैकेट उजागर हुआ है, जिसने न सिर्फ लोगों के विश्वास को ठगा, बल्कि उनकी सेहत को भी खतरे में डाला है।