रानी बाजार स्थित मालू भवन के पास, साध्वी संगीतश्रीजी और साध्वी डॉ. परमप्रभाजी के सान्निध्य में इस भोजनालय का उद्घाटन हुआ। इस अवसर पर जैन समाज के अलावा नगर के कई प्रतिष्ठित लोग उपस्थित थे।
युवाओं ने बताया कि इस भोजनालय की स्थापना का मुख्य उद्देश्य शहरवासियों को शुद्ध, सात्विक और घर जैसा भोजन उपलब्ध कराना है। जैन सिद्धांतों के अनुरूप, युवा टीम सादगी, स्वच्छता और पौष्टिकता का विशेष ध्यान रखते हुए इसका संचालन करेगी।
भोजनालय में नौकरीपेशा, विद्यार्थियों, यात्रियों और वृद्धजनों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए मात्र 60 रुपये में टिफिन सुविधा भी शुरू की गई है। इस रियायती दर पर शुद्ध भोजन उपलब्ध कराया जाएगा। उद्घाटन समारोह में उपस्थित गणमान्य नागरिकों ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे मानव सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।
युवा टीम ने बताया कि भोजनालय में जहां समर्थ लोगों के लिए रियायती दरों पर शुद्ध और सात्विक भोजन उपलब्ध होगा, वहीं जैन समाज के जरूरतमंद और बेसहारा लोगों को नि:शुल्क भोजन भी प्रदान किया जाएगा। ऐसे दीनबंधुओं की पहचान और पात्रता सुनिश्चित करने के लिए जैन युवाओं की एक टीम का गठन किया जाएगा। जांच में पात्र पाए जाने पर उनके भोजन की व्यवस्था भोजनालय में की जाएगी। युवाओं ने स्पष्ट किया कि इस भोजनालय का उद्देश्य लाभ कमाना नहीं, बल्कि समाज में दया और प्रेम का विस्तार करना है। भोजनालय का लक्ष्य नौकरीपेशा, कामकाजी लोगों और विद्यार्थियों को शुद्ध और सात्विक भोजन उपलब्ध कराना है।
युवाओं ने बताया कि जैन समाज हमेशा परोपकार के कार्यों में अग्रणी रहा है। वर्तमान में, श्री जैन भोजनालय में केवल जैन समाज के निर्बल लोगों के लिए नि:शुल्क भोजन की व्यवस्था की जा रही है। भविष्य में इस योजना का विस्तार किया जाएगा और इसे अन्य समाजों के निर्बल लोगों के लिए भी लागू करने की योजना है। पात्रता की जांच के बाद जरूरतमंदों के भोजन की व्यवस्था की जाएगी। युवा टीम द्वारा आपसी सहयोग से शुरू किए गए इस प्रकल्प में विस्तार के साथ सहयोग का भी विस्तार किया जाएगा।