श्रीडूंगरगढ़ में गोपाष्टमी का पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। विभिन्न गौशालाओं में विशेष आयोजन हुए, जिनमें गौमाता की महिमा का गुणगान किया गया और गौसेवा का संकल्प लिया गया।
कालूबास स्थित जीव दया गौशाला समिति के प्रांगण में गोपाष्टमी पर गौकथा महोत्सव का आयोजन किया गया। पंडित जी ने कथा का वाचन करते हुए गाय के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गौ रक्षा करने वाले लोक देवता बन गए। गौदान के महत्व को बताते हुए उन्होंने कहा कि गाय के देह में सभी देवता वास करते हैं और गौसेवा से सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं। उन्होंने आधुनिक युग में सुख और शांति की प्राप्ति के लिए बहु-बेटियों को गौसेवा से जुड़ने का आह्वान किया। महामंडलेश्वर आचार्य स्वामी भास्करानंदजी महाराज ने गौशाला पहुंचकर गौपूजन किया और गाय को सृष्टि का अनमोल रत्न बताया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा में भाग लिया और श्रीकृष्ण एवं गौपूजन में हिस्सा लिया।
सरदारशहर रोड पर स्थित श्रीपरमार्थ बाल गौशाला समिति में गोपाष्टमी का पर्व श्रद्धापूर्वक मनाया गया। गौशाला समिति के अध्यक्ष ताराचंद इंदौरिया और अन्य पदाधिकारियों ने विधि-विधान से श्रीकृष्ण और गौपूजन संपन्न करवाया। गौसेवा पर चर्चा में ताराचंद इंदौरिया ने हर घर को गौसेवा से जोड़ने का प्रयास करने की बात कही।
गांव कोटासर की श्री करणी गौशाला में गोपाष्टमी महोत्सव संत सान्निध्य में संपन्न हुआ। पंडित विजय जाजड़ा ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ श्रीकृष्ण व गौपूजन करवाया। संत रामेश्वरानंदजी महाराज ने गोपाष्टमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गौ चारण प्रारंभ करने की बात कहते हुए सभी श्रद्धालुओं से गौसेवा का संकल्प लेने का आग्रह किया। महंत सत्यानंदगिरी जी महाराज ने गाय को धर्म की धुरी बताते हुए सभी सनातनी घरों में गौसेवा को अनिवार्य रूप से करने की प्रेरणा दी।
विश्व हिंदू परिषद के सदस्यों ने गोपाष्टमी पर्व निराश्रित गौवंश की सेवा कर मनाया। कार्यकर्ताओं ने अलग-अलग स्थानों पर जाकर गौवंश को खल चूरी का मिश्रण खिलाया और लोगों से एक घर से एक गौवंश को खल खिलाने का आग्रह किया।
इन आयोजनों ने श्रीडूंगरगढ़ में गौसेवा के प्रति लोगों की श्रद्धा और समर्पण को दर्शाया। गोपाष्टमी के इस पावन अवसर पर, गौमाता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए, सभी ने सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।