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श्रीडूंगरगढ़ में 2 महीने चले सरकारी शिविर: 16 विभागों के 43 तरह के काम निपटाए, राजस्व रिकॉर्ड सुधार के 767 मामले सुलझे

नोडल अधिकारी और SDM शुभम शर्मा के कुशल मार्गदर्शन में 16 विभागों के अधिकारी मुस्तैद रहे। उन्होंने लोगों की पात्रता के अनुसार 43 तरह के कामों को मौके पर ही निपटाया। ये शिविर मानो गाँव की चौपाल बन गए, जहाँ लोगों की समस्याएँ सुनी गईं और उनका समाधान तलाशा गया।

इन शिविरों में ग्राम पंचायतों की मूलभूत सुविधाओं – बिजली, पानी, चिकित्सा और शिक्षा – की स्थिति पर भी बारीकी से नज़र रखी गई। जहाँ कहीं भी शिकायतें मिलीं, उनका तत्काल निवारण किया गया। जो समस्याएँ लंबित थीं, उन्हें संबंधित विभागों को जल्द से जल्द निपटाने के निर्देश दिए गए।

इन शिविरों में राजस्व विभाग ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। भू-राजस्व अधिनियम 1956 की धारा 136 के तहत राजस्व रिकॉर्ड शुद्धिकरण से जुड़े कुल 767 आवेदनों का मौके पर ही निस्तारण किया गया। यह धारा भू-अभिलेख अधिकारी को गलत प्रविष्टियों को संबंधित पक्ष की सहमति से ठीक करने का अधिकार देती है। ज़ाहिर है, लोगों को अपनी ज़मीन के कागज़ात दुरुस्त करवाने में इससे बड़ी मदद मिली।

SDM शुभम शर्मा ने शिविरों में लोगों को भूमि विवादों से बचने के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उनके सुझाव न केवल कानूनी पहलू पर रोशनी डालते हैं, बल्कि रिश्तों की अहमियत भी बताते हैं।

उन्होंने कहा कि पुश्तैनी जमीन को संयुक्त रखने से भविष्य में विवाद बढ़ने की आशंका रहती है। इससे सरकारी योजनाओं के लाभ मिलने में भी दिक्कत आती है। इसलिए समय रहते बंटवारा करवा लेना ही बेहतर है। बंटवारे में सबसे पहले खेत तक जाने का रास्ता तय करने की सलाह देते हुए उन्होंने कहा कि ऐसा न करने पर यह बाद में विवाद का कारण बन सकता है। उन्होंने बंटवारे के दौरान ही रास्ते को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज कराने पर ज़ोर दिया।

शर्मा ने लोगों से समझदारी दिखाने और रिश्तों को बचाने की अपील की। उन्होंने कहा कि विरासत या खरीद-फरोख्त के बाद रास्ते को लेकर अक्सर झगड़े होते हैं, जिससे परिवार टूट जाते हैं और लोग अदालतों के चक्कर काटते रहते हैं। उन्होंने लोगों को अदालत जाने से पहले सोचने की सलाह दी, क्योंकि जमीन के मामले कोर्ट में सालों तक चलते हैं, जिससे न केवल पैसा खर्च होता है, बल्कि मानसिक तनाव भी बढ़ता है।

उन्होंने उत्तराधिकार कानून के तहत बहनों के अधिकारों का सम्मान करने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि बहनें जब मुकदमे दायर करती हैं, तो परिवार में दूरियां आ जाती हैं। इसलिए आपसी सहमति से समाधान निकालना ही बेहतर है।

अंत में, उन्होंने रास्ते के मामलों में सहयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि खेत तक पहुंचने का रास्ता हर किसी की जरूरत है, झगड़े की वजह नहीं। उन्होंने पड़ोसियों और रिश्तेदारों के मामलों में सहयोग करने का आग्रह किया।

इन शिविरों ने न केवल सरकारी सेवाओं को लोगों तक पहुँचाया, बल्कि उन्हें अपनी समस्याओं का समाधान करने और रिश्तों को सहेजने के लिए भी प्रेरित किया। यह एक सराहनीय पहल है, जो लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकती है।

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