श्रीडूंगरगढ़, 22 अगस्त, 2025। दिल्ली से बीकानेर के लिए वंदे भारत एक्सप्रेस की घोषणा ने एक ओर जहाँ क्षेत्र में उत्साह का संचार किया, वहीं दूसरी ओर श्रीडूंगरगढ़ में ठहराव न होने की खबर से लोगों में निराशा फैल गई। अब यह मुद्दा केवल आमजन की भावनाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने राजनीतिक सरगर्मी भी बढ़ा दी है।
दिल्ली-बीकानेर के बीच चलने वाली इस महत्वाकांक्षी ट्रेन को लेकर लोगों में उम्मीद जगी थी कि अब राजधानी तक का सफर और सुगम हो जाएगा। लेकिन, जब ठहराव स्थलों की सूची सामने आई, तो श्रीडूंगरगढ़ का नाम गायब देखकर स्थानीय लोगों को गहरा आघात लगा।
इस मुद्दे पर अब क्षेत्र के नेता भी मुखर हो गए हैं। पीसीसी सदस्य हरीराम बाना ने जिला कलेक्टर और एसडीएम को पत्र लिखकर इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। अपने पत्र में उन्होंने श्रीडूंगरगढ़ की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा है कि यह क्षेत्र व्यापार और शिक्षा का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। यहाँ से प्रतिदिन हजारों लोग जयपुर, दिल्ली, जोधपुर और बीकानेर जैसे शहरों की यात्रा करते हैं। ऐसे में, वंदे भारत एक्सप्रेस का ठहराव यहाँ होने से छात्रों, व्यापारियों और किसानों को सीधा लाभ मिलेगा, साथ ही क्षेत्रीय विकास को भी नई गति मिलेगी।
उधर, राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) से जुड़े कार्यकर्ताओं ने भी इस मुद्दे को लेकर आंदोलन की चेतावनी दी है। आरएलपी नेता सुनील गोदारा ने कहा कि वे जनता के हक के लिए हर संभव प्रयास करेंगे और सरकार को श्रीडूंगरगढ़ की जनभावनाओं का सम्मान करना होगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि श्रीडूंगरगढ़ से बड़ी संख्या में प्रवासी देश-विदेश में बसे हुए हैं, और ऐसे में इस कस्बे को नज़रअंदाज़ करना दुर्भाग्यपूर्ण होगा।
इस मुद्दे पर उड़ीसा प्रवासी प्रवीण पुगलिया ने भी अपना समर्थन जताया है। क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता और नेता लगातार सरकार से आग्रह कर रहे हैं कि रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल इस मामले में हस्तक्षेप करें और श्रीडूंगरगढ़ में वंदे भारत एक्सप्रेस का ठहराव सुनिश्चित कराएं।
सूत्रों के अनुसार, स्थानीय लोगों का मानना है कि श्रीडूंगरगढ़ को नजरअंदाज करने से क्षेत्र के विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। अब देखना यह है कि सरकार इस जन-आक्रोश पर क्या रुख अपनाती है और श्रीडूंगरगढ़ के लोगों को वंदे भारत एक्सप्रेस की सौगात मिल पाती है या नहीं।