स्वर्गीय डूडी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया गया। वातावरण में शांति और सम्मान का भाव था, मानो हर कोई अपने प्रिय नेता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त कर रहा हो। दो मिनट का मौन रखा गया, प्रार्थना की गई कि ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें।
सभा में सरपंच प्रतिनिधि भागीरथ गोदारा ने स्वर्गीय डूडी के जीवन को याद करते हुए कहा कि वे हमेशा किसानों और आमजन के हितों के लिए संघर्ष करते रहे। उनका त्याग और नेतृत्व हम सबके लिए एक अनमोल प्रेरणा है।
भूराराम सारस्वत ने कहा कि डूडी जी ने राजनीति को कभी पद नहीं, बल्कि सेवा का माध्यम माना। उनकी विचारधारा और काम करने का तरीका आज भी लोगों के दिलों में जीवित है।
भाजपा नेता पुनीत स्वामी ने उनके द्वारा समाज के कमजोर वर्गों के लिए किए गए कार्यों को याद किया। उन्होंने कहा कि उनके निधन से क्षेत्र की राजनीति को एक ऐसा नुकसान हुआ है जिसकी भरपाई करना मुश्किल है।
श्रीकिशन गोदारा ने उनके सरल व्यक्तित्व, निष्ठा और सेवा भाव की बात की। उन्होंने कहा कि वे हमेशा आम लोगों के बीच रहकर उनकी समस्याओं को दूर करने की कोशिश करते थे।
श्रद्धांजलि सभा में बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे। तुलछाराम गोदारा, बाबूलाल सारस्वत, उप सरपंच रामदेव नाई, दामोदर खारड़ा, कालूराम नाई, श्रीकृष्ण गोदारा, गणेश गोदारा, शिव शर्मा जैसे अनेक लोगों ने स्वर्गीय डूडी के चित्र पर फूल चढ़ाकर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। स्वर्गीय रामेश्वर लाल डूडी भले ही शारीरिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी यादें और उनके किए गए कार्य हमेशा लोगों के दिलों में जीवित रहेंगे।