एसडीएम शर्मा ने कहा कि रास्ते जैसे मामूली विवादों को तूल देने से लोग अनावश्यक आर्थिक और मानसिक तनाव से ग्रस्त हो जाते हैं, जिसका सीधा असर उनके पारिवारिक और पड़ोसी संबंधों पर पड़ता है। उन्होंने लोगों से रास्ते की आवश्यकता को समझने और विवादों को बढ़ावा न देने की अपील की। उन्होंने कहा कि समझदारी से काम लेकर इन विवादों को आसानी से सुलझाया जा सकता है।
पारिवारिक भूमि विवादों पर प्रकाश डालते हुए शर्मा ने कहा कि उत्तराधिकार कानून के तहत भाई-बहनों के बीच संपत्ति विवादों में न्यायालय का दरवाजा खटखटाने से पहले गंभीरता से विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अदालतों के चक्कर काटने से आपसी रिश्तों में कड़वाहट आती है और आर्थिक नुकसान भी होता है।
शर्मा ने भूमि बेचने या विरासत में मिलने पर रास्ते के विवाद को लेकर रिश्तों को खराब न करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि ऐसा करने से अंततः न्यायालयों के चक्कर काटने की नौबत आ जाती है। पारिवारिक विवादों से बचने के लिए उन्होंने संयुक्त/पुश्तैनी भूमि का समय पर बंटवारा करवाने और संयुक्त खातेदारी को जल्द समाप्त करवाने की बात कही, जिससे राजकीय लाभ भी मिल सके।
इसके अतिरिक्त, एसडीएम शर्मा ने 17 सितंबर 2025 से 21 नवंबर 2025 तक आयोजित “प्रशासन गांवों के संग” शिविरों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इन शिविरों में 16 विभागों द्वारा 43 प्रकार के कार्य संपादित किए गए। इस दौरान बिजली, पानी, चिकित्सा एवं शिक्षा से संबंधित शिकायतों के निवारण के लिए सकारात्मक कदम उठाए गए। साथ ही, राजस्व रिकॉर्ड में शुद्धिकरण के लिए प्राप्त 767 प्रार्थना पत्रों का निस्तारण किया गया।
शुभम शर्मा ने नागरिकों से अपील की है कि वे आपसी सद्भाव और सहयोग से जीवन यापन करें, ताकि श्रीडूंगरगढ़ में एक शांतिपूर्ण और समृद्ध समुदाय का निर्माण हो सके।