श्रीडूंगरगढ़, 6 नवंबर 2025। श्रीडूंगरगढ़ के युवाओं को उच्च शिक्षा के स्वर्णिम अवसर प्रदान करने के लिए आजीवन समर्पित रहे डॉ. राधाकिशन सोनी ने मंगलवार की रात 2 बजे पीबीएम अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके निधन से श्रीडूंगरगढ़ में शोक की लहर दौड़ गई है।
डॉ. सोनी, श्रीडूंगरगढ़ महाविद्यालय के संस्थापकों में से एक थे। उन्होंने अपने जीवन में शिक्षा, साहित्य, पत्रकारिता और समाज सेवा के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी बहुमुखी प्रतिभा का परिचय दिया। वे एक शिक्षाविद्, विचारक, साहित्यकार और पत्रकार के रूप में जाने जाते थे, जिन्होंने समाज के लिए निष्ठापूर्वक योगदान दिया।
डॉ. सोनी एक विलक्षण प्रतिभा के धनी थे और हमेशा ईमानदारी से कर्म करने के भाव को प्रोत्साहित करते थे। उन्होंने “शोध स्वरूप व प्रविधि” और शिक्षा संबंधी एक दर्जन से अधिक पुस्तकों का लेखन किया। उनकी पुस्तक “राजस्थान के लोकदेवता” विशेष रूप से चर्चित रही। उन्होंने शिक्षा विभाग में अनेक कार्यशालाओं का संचालन किया और विषय की गहरी समझ और विश्लेषण क्षमता के कारण 2013 में उन्हें राज्यपाल द्वारा राज्य के श्रेष्ठ शिक्षक के रूप में सम्मानित किया गया था।
डॉ. सोनी निर्वाचन, जनगणना, साक्षरता, और प्लस पोलियो जैसे राष्ट्रीय महत्व के कार्यक्रमों में भी सक्रिय रूप से शामिल रहे। निर्वाचन में वे स्टेट लेवल मास्टर ट्रेनर थे और उन्हें चुनाव संबंधी नियमों और प्रावधानों की गहरी जानकारी थी। सूत्रों के अनुसार, जिला कलेक्टर कार्यालय ही नहीं, बल्कि राज्य स्तर तक चुनाव संबंधी जानकारी के लिए उनसे संपर्क किया जाता था।
डॉ. सोनी हमेशा विद्यार्थियों को पुस्तकें पढ़ने और जीवन को साफ-सुथरे ढंग से जीने की प्रेरणा देते थे। वे एक नवाचारी शिक्षक और मार्गदर्शक के रूप में सदैव तत्पर रहे। उनका मानना था कि जीवन ऐसा हो कि मंगलमय कर्म हो और मानवता ही धर्म हो। वे सामाजिक सरोकारों में गहराई से जुड़े हुए थे।
1967 में सरदारशहर में जन्मे डॉ. सोनी की कर्मभूमि जीवन भर श्रीडूंगरगढ़ ही रही। वे कुछ समय से गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। उनके परिवार में उनकी पत्नी और एक पुत्र हैं।
बुधवार को उनके निधन की खबर फैलते ही साहित्यकार श्याम महर्षि, डॉ. मदन सैनी, शिक्षाविद् डॉ. मनीष सैनी, बालाराम मेघवाल, वरिष्ठ पत्रकार विशाल स्वामी, विजय महर्षि, मांगीलाल राठी सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने शोक संवेदनाएं व्यक्त कीं। डॉ. सोनी का निधन श्रीडूंगरगढ़ के लिए एक अपूरणीय क्षति है, जिन्होंने शिक्षा और समाज के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।