अणचीदेवी अपने दो पुत्रों, सत्यनारायण पारीक और श्यामसुंदर पारीक, के साथ चार पुत्रियों और पौत्र-प्रपौत्रों से भरा एक विशाल परिवार छोड़ गई हैं। उनका जीवन, एक लंबी यात्रा की तरह था, जिसने उन्हें अनेक पीढ़ियों को एक साथ बांधे रखा।
शनिवार की सुबह 10 बजे, उनकी अंतिम यात्रा कालूबास स्थित पारीक निवास से शुरू होगी। यह यात्रा उन्हें सनातन श्मशानघाट कालूबास, श्रीडूंगरगढ़ की ओर ले जाएगी, जहाँ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
इस दुखद घटना के सम्मान में, व्यापार मंडल के महामंत्री संजय करनाणी ने जानकारी दी है कि मंडल द्वारा कल दोपहर 12 बजे तक बाजार बंद रखा जाएगा। यह निर्णय, अणचीदेवी के प्रति सम्मान और उनके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करने के उद्देश्य से लिया गया है।
अणचीदेवी का निधन, श्रीडूंगरगढ़ के समाज में एक पीढ़ी के अंत का प्रतीक है। उनका जीवन, त्याग, समर्पण और परिवार के प्रति अटूट प्रेम की मिसाल था।