बेनीसर गांव में नेशनल हाइवे के पास, शांत और हरे-भरे वातावरण में स्थित आर्यस्थली गुरुकुल आवासीय और गैर-आवासीय, दोनों प्रकार के शिक्षा विकल्प प्रदान करता है।
गुरुकुल के संस्थापक अमित आर्य के अनुसार, आवासीय छात्रों की दिनचर्या सुबह 4 बजे शुरू होती है, जिसमें योग, आसन, प्राणायाम, पारंपरिक खेल और ध्यान शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, यज्ञ, संध्या वंदन और वैदिक ग्रंथों के अध्ययन से विद्यार्थियों का आध्यात्मिक विकास किया जाता है। रात्रि 10 बजे तक छात्र गुरुकुल की दिनचर्या का पालन करते हैं। गुरुकुल में विद्यार्थियों को सुपाच्य और सात्विक भोजन दिया जाता है। इसके साथ ही, सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए सामान्य ज्ञान और शारीरिक प्रशिक्षण की कक्षाएं भी आयोजित की जाती हैं। अमित आर्य ने बताया कि ये सभी सुविधाएं छात्रों को अनुशासित और सुरक्षित वातावरण में किफायती शुल्क पर उपलब्ध कराई जा रही हैं।
अमित आर्य ने अभिभावकों से अपील की है कि वे अपने बच्चों को संस्कारवान, आज्ञाकारी, विवेकशील और धर्म व संस्कृति का ज्ञान प्राप्त करने के लिए गुरुकुल में प्रवेश दिलाएं। उन्होंने कहा कि गुरुकुल का उद्देश्य बच्चों को मोबाइल, गलत संगत और दूषित वातावरण से दूर रखकर चरित्रवान, ज्ञानवान, विवेकशील, विद्वान और बलवान बनाना है ताकि वे देश और धर्म की सेवा कर सकें। गुरुकुल बच्चों को अपनी परंपराओं, गौरवशाली इतिहास, सामाजिक सभ्यता और संस्कारों से परिचित कराता है।
आचार्य ने जानकारी दी कि विद्यालय और आवासीय गुरुकुल में प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। उन्होंने अभिभावकों को गुरुकुल परिसर का अवलोकन करने के लिए आमंत्रित किया है, ताकि वे अपने बच्चों के भविष्य को सुरक्षित कर सकें।